Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, May 2
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»करियर»Education

    एक ही छत के नीचे हो सब धर्मों की प्रार्थना

    ShagunBy ShagunJuly 11, 2022 Education No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 651

    डा0 जगदीश गांधी

    अब समय आ गया है जबकि सभी धर्मों के लोगों को एक ही स्थान पर एकत्रित होकर एक ही परमपिता परमात्मा की प्रार्थना करनी चाहिए। अर्थात एक ही छत के नीचे हो-अब सब धर्मों की प्रार्थना’ हो। अज्ञानता के कारण आज एक ही परमपिता परमात्मा की ओर से युग-युग में आये अवतारों को अलग-अलग मानने के कारण ही धर्म के नाम पर चारों ओर जमकर दूरियां बढ़ रही है, जबकि सभी अवतार एक ही परमपिता परमात्मा की ओर से युग-युग में आये हैं। इस प्रकार हम सब एक ही परमात्मा की संतानें हैं। लैटिन भाषा में रिलीजन के मायने जोड़ना होता है। अर्थात जो जोड़े वह धर्म है तथा जो तोड़े वह अधर्म है।

    रामायण में तुलसीदास जी ने ठीक ही लिखा है कि ‘जब जब होई धर्म की हानि – बाढ़हि असुर, अधम अभिमानी। तब तब प्रभु धरि विविध शरीरा – हरहिं कृपानिधि सज्जन पीरा।। अर्थात जब-जब धर्म की हानि होती है और संसार में असुर, अधर्म एवं अन्यायी प्रवृत्तियों के लोगों की संख्या सज्जनों की तुलना में बढ़ जाने के कारण धरती का संतुलन बिगड़ जाता है, तब-तब परम पिता परमात्मा कृपा करके धरती पर अपने प्रतिनिधियों (अवतारों) कृष्ण, बुद्ध, अब्राहीम, मुसा, महावीर, जरस्थु, ईसा, मोहम्मद, नानक, बहाउल्लाह आदि को मानवता का मार्गदर्शन कर समाज को सुव्यवस्थित करने के लिए युग-युग में विविध रूपों में भेजते रहे हैं।

    युग-युग में आये इन सभी अवतारों को दिव्य ज्ञान एक ही परमपिता परमात्मा से प्राप्त हुआ है। उदाहरण के लिए परमपिता परमात्मा ने 5000 वर्ष पूर्व कृष्ण की आत्मा में गीता के माध्यम से ‘न्याय’ का दिव्य ज्ञान भेजा। पुनः 2500 वर्ष पूर्व उसी परमपिता परमात्मा ने भगवान बुद्ध की आत्मा में त्रिपटक के माध्यम से ‘सम्यक ज्ञान’ व समता का दिव्य ज्ञान भेजा। 2000 वर्ष पूर्व उसी परमपिता परमात्मा ने कठोर मानव जीवन को करुणामय जीवन बनाने के लिए प्रभु ईसा मसीह की आत्मा में बाइबिल का ज्ञान भेजा। 1400 वर्ष पूर्व उसी परमपिता परमात्मा ने हज़रत मोहम्मद की आत्मा में कुरान के माध्यम से ‘भाईचारे’ का दिव्य ज्ञान भेजा। 400 वर्ष पूर्व उसी परमपिता परमात्मा ने स्वार्थपूर्ण मानव जीवन को त्याग (सच्चा सौदा) का पाठ पढ़ाने के लिए गुरु नानक देव जी की आत्मा में गुरूग्रंथ साहिब के माध्यम से ‘त्याग’ का दिव्य ज्ञान भेजा तथा लगभग 200 वर्ष पूर्व उसी परमात्मा ने मानव जीवन में बढ़ती हुई दूरियों को समाप्त कर एकता का पाठ मानव जाति को पढ़ाने के लिए बहाउल्लाह की आत्मा में किताबे अकदस का ज्ञान भेजा।

    परमात्मा की आत्मा के पुत्र होने के कारण हम सब एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैं। उस परमपिता परमात्मा की प्रार्थना हम मंदिर में करें, मस्जिद में करें, गिरजाघर में करें या गुरूद्वारे में करें, और चाहे किसी भी भाषा में करें, हमारी प्रार्थनाओं को सुनने वाला ईश्वर एक ही है। अलग-अलग स्थानों, भाषाओं, वेश-भूषाओं में परमपिता परमात्मा को याद करने से धरती पर यह अज्ञान फैल गया है कि धर्म एक नहीं अनेक हैं। परमपिता परमात्मा की प्रार्थना करने के लिए किसी विशेष प्रकार की वेश-भूषा, भाषा, जाति-धर्म, स्थान आदि से कोई लेना-देना नहीं है।

    गीता में जब भगवान श्रीकृष्ण से उनके शिष्य अर्जुन ने पूछा कि भगवान! आपका धर्म क्या है? भगवान श्रीकृष्ण ने अपने शिष्य अर्जुन को बताया कि मैं सारी सृष्टि का सृजनहार हूँ। इसलिए मैं सारी सृष्टि के सभी प्राणी मात्र से बिना किसी भेदभाव के प्रेम करता हूँ। इस प्रकार मेरा धर्म अर्थात कर्तव्य सारी सृष्टि के प्राणी मात्र से प्रेम करना है। इसके बाद अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि भगवन् मेरा धर्म क्या है? भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तुम मेरी आत्मा के पुत्र हो। इसलिए मेरा जो धर्म अर्थात कर्तव्य है वही तुम्हारा भी धर्म अर्थात कर्तव्य है। अतः सारी मानव जाति की भलाई करना ही तुम्हारा भी धर्म अर्थात् कर्तव्य है। भगवान श्रीकृष्ण ने बताया कि इस प्रकार तेरा और मेरा दोनों का धर्म एक ही है।

    इस प्रकार परमपिता परमात्मा की ओर से युग-युग में आये किसी भी महान अवतार ने कोई अलग धर्म नहीं दिया है। जिस प्रकार से परमपिता परमात्मा शाश्वत और अपरिवर्तनीय है उसी प्रकार से उसका धर्म भी शाश्वत और अपरिवर्तनीय है। परमपिता परमात्मा का जो धर्म है वही धर्म उसकी सभी संतानों का भी धर्म है। मनुष्य का सदैव से एक ही धर्म (कर्तव्य) रहा है – प्रभु इच्छाओं को जानना तथा उन पर चलना। पवित्र पुस्तकों गीता, त्रिपटक, बाईबिल, कुरान, गुरू ग्रन्थ साहिब, किताबे अकदस आदि में एक ही परमपिता परमात्मा के द्वारा भेजी गई न्याय, समता, करूणा, भाईचारा, त्याग एवं हृदयों की एकता की शिक्षाओं को जानना तथा उसके अनुसार संसार में रहकर पवित्र भावना से प्रभु की इच्छाओं और आज्ञाओं के अनुसार कार्य करना ही हर प्राणी का धर्म है। इस प्रकार प्रभु की इच्छाओं को जानकर तथा उनके अनुसार कार्य करने के अलावा किसी भी प्राणी का और कोई भी दूसरा धर्म नहीं है।

    आज धर्म के नाम पर बढ़ती हुई दूरियाँ सिर्फ अज्ञानता के कारण है। जबकि सभी धर्मों का उद्देश्य सम्पूर्ण मानव जाति के हृदय में प्रेम व एकता की भावना को बढ़ाकर सारी पृथ्वी पर आध्यात्मिक सभ्यता की स्थापना करना है। सभी धर्मो का स्रोत एक ही परमपिता परमात्मा है और हम सब एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैं। धर्म के नाम पर होने वाली दूरियों का कारण धर्म के प्रति लोगों का अज्ञान है। जब हम सभी एक ही परमात्मा की संतानें हैं तो हमारे धर्म अलग-अलग कैसे हो सकते हैं? इसलिए स्कूलों में बच्चों एवं टीचर्स के द्वारा की जाने वाली सामूहिक प्रार्थना की तरह ही समाज में भी सभी धर्मों, जातियों एवं सम्प्रदायों के लोगों को एक ही जगह पर इकट्ठे होकर सामूहिक रूप से एक ही परमपिता परमात्मा की प्रार्थना करनी चाहिए और यही प्रभु-प्रार्थना करने का सबसे सही तरीका भी है। अर्थात एक ही छत के नीचे हो-अब सब धर्मों की प्रार्थना’ हो।

    Shagun

    Keep Reading

    मातृत्व: सृष्टि का शाश्वत सत्य और ईश्वर का प्रतिरूप

    जानो तो बुद्ध की सहजता सबसे सहज वरना अति जटिल

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ भविष्य की ओर एक ठोस कदम

    In Paris, fragrance is bottled; in Banaras, the fragrance is in the very air—and that is a truly wonderful feeling.

    पेरिस में खुशबू बोतल में होती है, और बनारस में खुशबू हवा में है यह बहुत अच्छा अहसास है

    Parents have been subjected to such manipulation for a very long time—it is simply that awareness has increased now.

    खेल तो पेरेंट्स के साथ बहुत पहले से होता आया है -जागरूकता अब बढ़ी

    Stepping into the Next Level of AI! DCESIS Students from Lucknow Triumph at IBM Hackathon

    एआई के अगले स्तर पर कदम! लखनऊ के डीसीएसआईएस छात्रों ने IBM हैकथॉन में मारी बाजी

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    “Move Beyond the Top 10” — Farah Khan’s New Travel Mantra

    “टॉप-10 से आगे बढ़ो”-फराह खान का नया ट्रैवल मंत्र

    May 2, 2026
    Becoming the Voice of Journalists on Labour Day, Memorandum Submitted to Deputy Chief Minister

    श्रम दिवस पर पत्रकारों की आवाज़ बनी, उपमुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

    May 2, 2026
    Prakash Parv of Guru Amardas Ji: A sacred gathering of service and peace.

    गुरु अमरदास जी का प्रकाश पर्व: सेवा और सुरति का पावन समागम

    May 2, 2026

    मातृत्व: सृष्टि का शाश्वत सत्य और ईश्वर का प्रतिरूप

    May 2, 2026
    Hayatullah Ansari's 125th Birth Anniversary: ​​A Beautiful Confluence of Memories in Lucknow

    हयातुल्लाह अंसारी की 125वीं जयंती: लखनऊ में यादों का सुंदर समागम

    May 2, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading