Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, July 24
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»करियर»Education

    संस्कार विहीन शिक्षा होती है घातक

    ShagunBy ShagunSeptember 4, 2022 Education No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 1,675

    (शिक्षक दिवस- पांच सितम्बर पर विशेष)

    स्वाती सिंह

    पहले एमबीए, बीटेक आदि में लगभग सभी छात्र सामान्य से कुछ ऊपर परिवारों से ही आते थे। उनमें हर वक्त स्मार्ट बने रहने की ललक भी दिखती थी, यह ललक अब भी दिखती है लेकिन इसी में कुछ ऐसे भी आते हैं, जो अभाव में जिंदगी गुजारकर भी अच्छी पढ़ाई के लिए लालायित रहते हैं। इसी तरह का एक हमारा शिष्य था योगेश। जहां दूसरे विद्यार्थी कार, मोटरसाइकिल से आते थे, वहीं वह साइकिल से आता था। क्लास में हमेशा प्रश्न पूछने की जिज्ञासा बनी रहती थी। उसके सामान्य वेष-भूषा पर दूसरे लड़के उसको कभी-कभार चिढ़ाते भी थे, लेकिन जब रिजल्ट तो वह पूरे क्लास में टाप किया। उसकी पढ़ने के प्रति जिज्ञासा देखकर मैं क्लास से इतर उसे घर पर भी पढ़ाती थी। बाद में पूरी फेकेल्टी में टाप किया।


    यह योगेश की हकीकत मात्र एक उदाहरण है। 2001 से एक दशक तक लखनऊ विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य के अनुभवों के आधार पर यह कह सकती हूं कि शिक्षा का स्वभाव “अभाव” है। यदि अभाव की अनुभूति नहीं हुई तो आगे बढ़ने व शिक्षा में ध्यान केन्द्रित करने की ललक भी मर जाएगी। सुसभ्य व सुसंस्कृति की शिक्षा भी ज्यादातर अभाव में ही मिलती है, जिसकी आज बहुत जरूरत है। यदि शिक्षा ग्रहण करते समय शिष्य खुद को राजा समझे तो वह कभी गुरु के शरण में नहीं रह सकता। ऐसे में उसके मन में हमेशा धन का घमंड रहेगा। यदि उसके धन का घमंड रहा तो वह कभी शिक्षक के कही बात को अपने मन में नहीं उतार सकता।

    इसी कारण तो गुरुकुल परंपरा बनी थी। जहां राजा दशरथ के पुत्र आदर्श भगवान श्रीराम भी आश्रम में जाकर ही शिक्षा ग्रहण किये। आश्रम में रहते हुए जंगलों की लकड़ियां बिनकर हमेशा आश्रम के भोजन की व्यवस्था करते रहे। क्या राजा दशरथ अपने घर में पढ़ाने की व्यवस्था नहीं कर सकते थे, लेकिन घर में वह अभाव की अनुभूति नहीं हो सकती। यदि अभाव की अनुभूति नहीं होगी तो स्वभाव में परिवर्तन नहीं हो सकता। स्वभाव को संस्कारवान बनाने के लिए अभाव की अनुभूति जरूरी है।

    आज बदलते समय में यह जरूरी हो गया है कि बच्चों को किताबी ज्ञान से पूर्व ही संस्कार का ज्ञान जरूरी है। यदि संस्कारवान युक्त ज्ञानी बनेगा तो वह कभी दुखी नहीं रह सकता। अभावों में भी वह लड़ने की क्षमता रखेगा। सामाजिकता यदि रहेगी तो वह हमेशा जिंदा दिल रह सकता है, वरना अभावों के समय वह तुरंत निराशा में चला जाएगा। यह शिक्षा परिवार को व गुरू को दोनों को निभानी पड़ेगी, वरना आने वाली पीढ़ी अर्थवान हो सकती है, लेकिन संस्कारवान नहीं और संस्कार के बिना अर्थ बेमतलब सिद्ध होता है। यदि आपने अपने बुढ़ापे की लाठी के रूप में अपने पुत्र को धनवान बना ही दिया और वह लाठी बनकर आप पर टूट पड़े तो फिर वह संस्कार विहीन शिक्षा का क्या औचित्य। इसे आज बहुत जरूरी है समझना।

    Image

    जितने पहले के लोग हैं, सभी को याद होगा, बच्चों की पुस्तकों में एक नैतिक शिक्षा की भी किताब होती थी। उसके पीछे कहानियों के माध्यम से बच्चों में संस्कार डालना उद्देश्य था। हकीकत भी है, उसका असर भी होता है। पहले दादा-दादी का भी एक महत्वपूर्ण काम हुआ करता था, बच्चों को अच्छी कहांनियां सुनाना। वह भी बच्चों को संस्कारयुक्त बनाने में महती भूमिका निभाते थे, लेकिन आज हम अच्छे स्कूलों में दाखिला कराकर अपने कर्तव्यों का ईतिश्री कर लेते हैं। हमारे पास बच्चों को समय देने के लिए समय का ही अभाव रहता है या समय रहने पर भी हम समय नहीं दे पाते। जब हम अपने बच्चे को समय नहीं दे पाते, ऐसे में हम स्कूल में सैकड़ों बच्चों के साथ सिर्फ अध्यापक से समय देने की बात कैसे सोच सकते हैं।

    अब देखिये न 31 अगस्त को झारखंड के दुमका के गांव में छात्रों अपने गुरु को पेड़ में बांधकर इस कारण पीटा, क्योंकि उन्होंने प्रैक्टिकल में कम नम्बर दिये थे। यही नहीं, इसका विधिवत विडियो भी बनाया, जिसमें कहते हुए सुने जा रहे थे कि इसे वायरल करना है। यह सवाल सिर्फ क्राइम का नहीं है। यह सवाल संस्कारों का है, जो गिरता जा रहा है। ऐसे में क्या वे शिष्य कभी वैसे गुरु से पढ़ पाएंगे, क्या ऐसे शिष्यों के सामने कभी गुरू की गुरूता प्रकट हो सकती है। वे खुलकर कभी पढ़ा सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में तो अध्यापक भी केवल अपनी औपचारिकता पूरी करने और वेतन लेने के लिए प्रतिबद्ध हो जाएगा। यह तो एकमात्र उदाहरण है। कुछ ऐसी परिस्थितियां कई बार बन जाती हैं, जिससे गुरु शिष्य की परंपरा ही समाप्त प्राय हो जाती है। न गुरु पढ़ा पाता है और न ही शिष्य पढ़ता है। दोनों अपनी-अपनी औपचारिकता पूरी कर चलते बनते हैं।

    इस तरह से गुरु और शिष्य के बीच बढ़ते दुराव के लिए कोई एक दोषी नहीं है। इसके लिए दोनों दोषी हैं। अपने अनुभवों के आधार पर कह सकती हूं कि अर्थ के युग ने संस्कृति का ह्वास कर दिया है। अधिकांश मां-बाप अच्छे स्कूल में भेजकर, अच्छी फीस जमाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। न बच्चों के बदलते व्यवहार पर कभी ध्यान देते हैं और न ही उनके अध्यापकों से जाकर मिलना पसंद करते हैं। इससे बच्चे भी मनमानी होने लगते हैं। इसी के लिए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और योगी आदित्यनाथ बार-बार संस्कार युक्त शिक्षा पर जोर देते हैं।
    विशेषकर संस्कार और उच्च गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के लिए तो राज्यपाल का प्रदेश सदा आभारी रहेगा। मैं जहां तक देखती हूं, उच्च शिक्षा विभाग की जब भी बैठक होती है, चाहे व किसी मुद्दे पर हो, बच्चों में संस्कार युक्त शिक्षा देने की बात करना राज्यपाल नहीं भूलतीं। उनके आने के बाद तो उप्र के विश्वविद्यालयों को कायाकल्प ही हो गया। उन्हीं के आने का नतीजा रहा कि कभी नैक मूल्यांकन कराने से भी दूर रहने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय आज ए प्लस, प्लस के साथ प्रदेश के सर्वोच्च विश्वविद्यालयों में सुमार हो गया।

    इस अर्थ के जमाने में गुरु-शिष्य व परिजन तीनों को समझना होगा। मैं अर्थयुग की विरोधी नहीं हूं। बदलते जमाने के साथ बदलाव भी जरूरी है, लेकिन यदि हम अपनी भाषा व सभ्यता को छोड़ दूसरों का नकल करें तो वैसे हम एक कदम आगे नहीं बढ़े, जब हम खुद की अच्छाई को समेटे हुए दूसरों की अच्छाई को भी अपने में समाहित करते हैं, तब तो हम प्लस करते हैं। हमें प्लस करने पर विचार करना होगा। अपनी संस्कृति का ज्ञान बच्चों में कराना होगा।

    गुरू को भी बच्चों के सामने अर्थ नहीं, गुरु-शिष्य परम्परा को अपनाना होगा। उसके सामने यह दिखाने की जरूरत होगी कि वे हर कदम पर अपने शिष्य के साथ हैं। परिवार के सदस्यों को भी अपने बच्चों को एहसास कराना होगा कि गुरु से शिक्षा तभी ग्रहण की जा सकती है, जब उसकी शिष्यता ग्रहण की जाय।

    (लेखिका- प्रदेश सरकार में मंत्री व लखनऊ विश्वविद्यालय में 2001 से एक दशक तक अध्यापन का कार्य कर चुकी हैं।)

    Shagun

    Keep Reading

    You will feel proud when you look at your reflection in the mirror... You lost your job, but not your principles!

    शीशे में चेहरा देखकर गर्व होगा… नौकरी चली गई, लेकिन सिद्धांत नहीं!

    Surgeon Vice Admiral Arti Sarin visited the 7 Air Force Hospital in Kanpur.

    सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन ने कानपुर के 7 एयर फोर्स अस्पताल का दौरा किया

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका! इंदौर की सोनम रघुवंशी को फिर जाना पड़ेगा जेल, जमानत रद्द

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका! इंदौर की सोनम रघुवंशी को फिर जाना पड़ेगा जेल, जमानत रद्द

    Major allegation by the 'Cockroach Janata Party'! Accusation against the BJP of sending goons to the protest site; statement by Abhijit Dipke.

    कोकरोच जनता पार्टी का बड़ा आरोप!

    Gorakhpur receives a major gift!

    गोरखपुर को मिली सिक्स लेन फ्लाईओवर की बड़ी सौगात!

    Three sisters—all social media content creators—marry the same cameraman simultaneously; they take the seven sacred vows in a temple!

    तीन रीलबाज बहनों का एक साथ एक ही कैमरामैन से विवाह, मंदिर में सात फेरे!

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    You will feel proud when you look at your reflection in the mirror... You lost your job, but not your principles!

    शीशे में चेहरा देखकर गर्व होगा… नौकरी चली गई, लेकिन सिद्धांत नहीं!

    July 24, 2026
    Enough of 'Mann Ki Baat' (talk from the heart); now, O Ruler, speak of 'Jan Ki Baat' (the voice of the people)!!

    मन की बात बहुत हुई, अब जन की बात करो राजन्!!

    July 23, 2026
    Surgeon Vice Admiral Arti Sarin visited the 7 Air Force Hospital in Kanpur.

    सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन ने कानपुर के 7 एयर फोर्स अस्पताल का दौरा किया

    July 23, 2026
    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका! इंदौर की सोनम रघुवंशी को फिर जाना पड़ेगा जेल, जमानत रद्द

    सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका! इंदौर की सोनम रघुवंशी को फिर जाना पड़ेगा जेल, जमानत रद्द

    July 23, 2026
    Major allegation by the 'Cockroach Janata Party'! Accusation against the BJP of sending goons to the protest site; statement by Abhijit Dipke.

    कोकरोच जनता पार्टी का बड़ा आरोप!

    July 23, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading