Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 886 शिव मेरे आराध्य हैं ( पारद शिवलिंग ) तुम्हीं सुनोगे अब मेरे भोले इन उलझनों को दूर कर दो मैं जो जो चाहूँ वो भी दे दो जो तुम भी चाहो वो भी दे दो हमें तुम्हारी मर्ज़ी क़ुबूल भगवन जो भी करोगे भला ही होगा अश्विनी यादव
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन