दासता के दौर में रानी अहिल्या बाई ने स्वतन्त्र और स्वाभिमानी शासन संचालन की मिसाल कायम की थी। उनका जीवन सुशासन और सनातन के प्रति समर्पित था। इसमें परिवारवाद की प्रति मोह नहीं था। मलवा की जनता को अहिल्या बाई ने अपना परिवार माना। उनकी सेवा करती रहीं। इसलिए लोकमाता की रुप में उन्हें प्रतिष्ठा मिली।
गरीब कल्याण ओर नारी सशक्तिकरण की उनकी योजनाएं आधुनिक लोककल्याणकारी शासन के लिए मार्गदर्शन की भांति हैं। उन का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में हुआ था. उनका विवाह मराठा साम्राज्य के सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव होलकर के साथ हुआ था.
1767 से 1795 तक 28 साल उन्होंने शासन किया. ओंकारेश्वर नर्मदा किनारे उन्होंने महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया था। सनातन आस्था के अनुरूप मंदिरों में विद्वानों की नियुक्ति की। काशी, गया, सोमनाथ, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, द्वारिका, बद्रीनारायण,रामेश्वर, जगन्नाथ पुरी इत्यादि प्रसिद्ध तीर्थस्थानों पर मंदिर बनवाए।
कलकत्ता से बनारस तक की सड़क, बनारस में अन्नपूर्णा का मन्दिर, गया में विष्णु मन्दिर बनवाये। बड़ी संख्या मे घाट कुओं और बावड़ियों का निर्माण करवाया, मार्ग बनवाए। गरीबों की लिए सदाब्रत अन्नक्षेत्र स्थापित किए। पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था कराई। उन्होंने कई युद्धों में अपनी सेना का नेतृत्व किया। अंग्रेजों को अपने राज्य में पांव पसारने नहीं दिए।
- डॉ दिलीप अग्निहोत्री







