ग्रांउड रिपोर्टिंग तो खूब की थी, इत्तेफाकन डाइनिंग रिपोर्टिंग की सिचुएशन दिलचस्प रही। मौका था लखनऊ के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त समाजसेवी इमदाद इमाम साहब के दावत-ए-वलीमे का। अहले ख़ाना,अहले मोहल्ला, उलमा, धार्मिक गुरु, समाजसेवी और तमाम शोबों से जुड़े तमाम लोगों के साथ सियासी पार्टियों के नुमाइंदे भी मौलाना इमदाद के दावत-ए-वलीमे में शरीक थे।
लज़ीज़ लखनवी जायके में सियासी खुश्बू भी महक रही थी। शाही टिक्के, शाही टुकड़े,शाही पनीर, वेज, नान वेज बिरयानी की मिली-जुली खुश्बू में हालात-ए-हाजरा की चर्चाएं भी महक रही थीं। गर्म रोटी के इंतेज़ार में दस्तरखान पर गर्म शीलमार का आ जाना पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक के इंतेज़ार में जाति जनगणना का एलान जैसा था। जायकों की खुश्बू के बीच वक्फ बोर्ड और तमाम सियासी मुद्दे भी महफ़िल में महक रहे थे।
एक डाइनिंग टेबल पर एक तरफ गांधी परिवार (दस जनपथ) की खासमखास कहे जाने वाली कांग्रेस नेत्री सदफ जाफर और सपा मुखिया अखिलेश यादव के खास नेता अनूप सांडा यानी सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच बैठा तो खुशबूदार जायकेदार लज़ीज़ खाने के साथ सपा-कांग्रेस के गठबंधन के सियासी मसालों की रिपोर्टिंग भी हो गई। कांग्रेस और सपा के बीच बेहतर तालमेल और सामंजस्य के लिए दोनों दलों के शीर्ष नेताओं को गंभीरता से सोचना होगा। इत्तेफाक से सपाई अनूप और कांग्रेसी सदफ की ऐसी मंशा भरी बातों के दरम्यान बैठा था, उनकी बातें मेरे कानों तक पहुंच रही थीं। ख़ामोशी से हो रही राज़ की बातों में ये भी जिक्र हुआ कि दोनों दलों में कुछ भाजपाई शक्तियां साइलेंट किलर का काम कर रही हैं। ये ताकतें सपा-कांग्रेस में दूरियां मिनटेन रखने के लक्ष्य पर काम कर रही हैं। कुछ ट्वीट और बयान ऐसी छिपी हुई साजिश की बानगी है। इंडिया गठबंधन में सपा-कांग्रेस के बीच कोई तो है जो नहीं चाहता कि सपा-कांगेस का दोस्ताना क़ायम रहे।
हांलांकि दोनों दलों के वर्कर्स चाहते हैं कि दूरियां कम हों, इसके लिए दोनों दलों के शीर्ष नेताओं को साझा कार्यक्रम करने के दिशानिर्देश देने की जरुरत है, वर्तमान रिश्तों में मधुरता पैदा करने के बजाय अतीत के गढ़े मुर्दे ना उखाड़े जाएं और इंदिरा व जेपी के मतभेदों पर चर्चाएं आयोजित ना हों।
लोकसभा में सपा-कांग्रेस गठबंधन को यूपी की जनता ने जिताया लेकिन इंडिया गठबंधन की इस जीत का उत्साह जमीन पर नजर नहीं आया। एक बार भी सपा-कांग्रेस के 43 सांसद जनता की जरूरतों के लिए एकजुट होकर जमीनी संघर्ष करते जमीन पर नजर आते तो यूपी की सियासत का मंज़र कुछ और ही होता।
खाने के दौर के साथ बातों का दौर भी तीखे पन से मिठास की तरफ बढ़ा। खीर,ज़र्दा, आईसक्रीम और शाही टुकड़े टेबल पर सजने लगे। दोनों नेताओं ने आपस में वादा किया कि वो अपने-अपने शीर्ष नेताओं के मार्गदर्शन में दोनों दलों के आपसी रिश्तों में मिठास घोलने की हर संभव कोशिश करेंगे !
सामने रखी आइसक्रीम जो पहले सख्त थी पिघल कर मिठास बिखेरने लगी थी। दूसरी सफ के खाने के इंतेज़ाम के लिए वेटर बिखरा हुआ रायता समेट रहा था..
– डाइनिंग रिपोर्टिंग बाय नवेद शिकोह







