लखनऊ, 6 मई : मथुरा के गोवर्धन इलाके में हाल ही में कुछ बंदरों की असामान्य मृत्यु के मामले में स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए हैं। पुलिस ने घटना की गहन जांच शुरू कर दी है और एक विदेशी साधु को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, साधु पर एयर गन का उपयोग करने का आरोप है। बंदरों की मृत्यु के सटीक कारण का पता लगाने के लिए उनके शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। स्थानीय समुदाय और प्रशासन मिलकर इस मामले को सुलझाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बता दें कि मथुरा के गोवर्धन इलाके में दर्जनभर से ज्यादा बंदरों की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक विदेशी साधु बाबा अक्सर एयर गन से बंदर भगाता था। पुलिस ने विदेशी बाबा को कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू की। मौत की वजह जानने के लिए बंदरों का PM कराया जा रहा।
क्या कहता है मथुरा मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम :
भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रमुख कानून वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) है। यह अधिनियम वन्यजीवों और उनके आवासों की रक्षा, अवैध शिकार, तस्करी और उत्पीड़न को रोकने के लिए बनाया गया है।
यदि बंदरों की मृत्यु जानबूझकर या एयर गन जैसे उपकरण से हुई, तो यह अधिनियम के तहत अपराध हो सकता है। बंदर (जैसे रीसस मकाक) आमतौर पर अनुसूची II में आते हैं, और उनका उत्पीड़न दंडनीय है। पुलिस और वन विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर उचित धाराओं के तहत कार्रवाई कर सकते हैं।







