नयी दिल्ली, 17 अक्तूबर। एमिटी लॉ स्कूल के एक छात्र की पिछले वर्ष आत्महत्या के मामले में पुलिस जांच की ढीली-ढाली स्थिति रिपोर्ट पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज पुलिस को फटकार लगाई।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति नाजमी वजीरी रिपोर्ट से नाखुश थे क्योंकि उसमें इस बात का जिक्र नहीं था कि जांच कब खत्म होगी। उन्होंने केवल इतना कहा कि जांच काफी आगे बढ चुकी है।
पीठ ने कहा कि रिपोर्ट के साथ कोई हलफनामा नहीं है जैसा कि अदालत ने 11 अक्तूबर को आदेश दिया था।
अदालत ने डीसीपी अपराध (मादक पदार्थ) को निर्देश दिया कि अंतिम रिपोर्ट या आरोपपत्र चार हफ्ते के अंदर दायर करें और मामले की अगली सुनवाई की तारीख 29 नवम्बर तय की।
पीठ ने कहा, जांच के काफी आगे बढने से आपका क्या मतलब है? आपने क्या यह ढीली-ढाली रिपोर्ट दायर की है? यह सब क्या है? यह कुछ नहीं है।
एमिटी में कानून के तीसरे वर्ष के छात्र सुशांत ने दस अगस्त 2016 को अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी क्योंकि कक्षा में आवश्यक उपस्थिति नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय ने कथित तौर पर उसे सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने से रोक दिया था।







