लोगों में अभी भी साइबर जागरूकता की कमी, आरोपियों से 1.29 करोड़ रूपये को लेकर करेगी बरेली पुलिस पूछताछ
लखनऊ, 6 जुलाई : साइबर जालसाज किस कदर लोगों पर हावी हैं इनके फ्रॉड किस्से आये दिन सुर्खियां बनते हैं। बरेली के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक को तीन दिन डिजिटल अरेस्ट करने वाले चार बदमाशों को एसटीएफ व बरेली साइबर क्राइम की संयुक्त टीम ने आरोपियों को लखनऊ से गिरफ्तार कर बरेली पुलिस को सौंप दिया। आरोपियों से 1.29 करोड़ रूपये को लेकर बरेली में पूछताछ करेगी। मीडिया से बातचीत में एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर ने बताया कि शुकदेव नंदी इज्जतनगर के आईवीआरआई कैंपस में रहते हैं वह भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि बीते 17 जून को उनके व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आइ जिसमें वीडियो कॉल करने वाले ने कहा कि मैं बेंगलुरु से सीबीआई ऑफिसर बोल रहा हूं। आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके फर्जी सिम कार्ड निकाले गए हैं, जिनका इस्तेमाल ह्यूमन ट्रैफिकिंग और जॉब फ्रॉड में किया गया है। फोन करने वाले शख्स ने शुकदेव नंदी से कहा कि एक नंबर आपको सीबीआई अधिकारी का दे रहा हूं, इन्हें कॉल करिए। उसने भी वही कहानी बताई जो पहले उन्हें बताई गई थी। इसके बाद उनके अकाउंट से आरटीजीएस के माध्यम से 18 जून को 1.10 करोड़ रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए। जाल में फंसाने के लिए मोबाइल स्क्रीन पर पुलिस का लोगो भी दिखाया।
फ्रॉड करने पहले जीता वैज्ञानिक का भरोसा
उन्होंने बताया कि साइबर ठगों ने रिटायर्ड वैज्ञानिक से जिस तरह बात की, उससे उन्हें यकीन हो गया था कि कॉल करने वाला असली पुलिस ऑफिसर है। इसके बाद उनके दूसरे खातों की जानकारी मांगी तो उन्होंने ग्रामीण बैंक का खाता नंबर भी बता दिया। इसके बाद ठगों ने उन्हें 1 लाख रुपए लौटा दिए, जिससे उन्होंने वैज्ञानिक का भरोसा जीत लिया। 19 जून को एक बार फिर से ठगों ने उनके खाते से 10 लाख और 20 जून को 9 लाख रुपए निकलवा लिए। वहीं जब साइबर ठगों ने उनसे और रुपए की डिमांड की तो उन्होंने बैंक में पर्सनल लोन के लिए अप्लाई किया। लेकिन बैंक ने लोन देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने वह दोनों नंबर गूगल पर चेक किए और बेंगलुरु पुलिस से फोन करके जानकारी ली, तो उन्हें पता चला कि उनके साथ फ्रॉड हुआ है।
ऐसे खुला राज
सीबीआई अफसर बनकर ठगी करने वाले साइबर जालसाज हुए गिरफ्तार
एसपी क्राइम ने बताया कि शुकदेव नंदी की ओर से इस मामले की शिकायत 26 जून को साइबर थाने में की थी। लखनऊ एसटीएफ और बरेली पुलिस ने जिन बैंक के एकाउंट से पैसे निकाले गए थे उनकी सीसीटीवी चेक की। उसमें चार युवक पैसे निकालते दिखे। शक के आधार पर उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने ठगी की बात कबूल कर ली। उनकी पहचान लखनऊ एक दुबग्गा के रहने वाले सुधीर कुमार चौरसिया ( 26 ), खदरा के रहने वाले श्याम कुमार वर्मा ( 27 ), गोमती नगर एक्सटेंशन के रहने वाले महेन्द्र प्रताप सिंह और गोंडा के रहने वाले रजनीश द्विवेदी ( 25 ) के रूप में हुई है।
पढ़े लिखे युवा हैं जालसाज
एसपी क्राइम के अनुसार सुधीर ने बी. कॉम, रजनीश द्विवेदी और श्याम कुमार वर्मा ने बी.ए, महेन्द्र प्रताप सिंह ने बी. एससी की पढ़ाई की है। इनके पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल बरामद हुए हैं। जिनके जरिए ये मेन हैंडलर से बात करते हैं। ये लोग कई राज्यों में फैले हुए हैं इनके मुख्य हैंडलर मिडिल ईस्ट और साउथ ईस्ट एशिया में बैठे हैं। वहीं से कॉल कराकर भारतीयों और पाकिस्तानी लोगों को पुलिस या एजेंसी का अधिकारी बताकर डराते हैं फिर ठगी करते हैं। गिरफ्तार किए गए युवकों ने बताया कि वह विभिन्न खाता धारकों की सहमति से कमीशन पर उनका खाता लेकर, उनके माध्यम से ठगी की गई रकम को कई अकाउंट में ट्रांसफर कराते हैं। अंत में रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर वॉलेट में भेज देते हैं।
डिजिटल अरेस्ट से बचने के उपाय:
संदिग्ध कॉल/मैसेज की पहचान: अज्ञात नंबरों से आने वाले कॉल या मैसेज, जो डराने या तुरंत कार्रवाई की मांग करें, पर भरोसा न करें।
वेरिफिकेशन: कॉलर के दावों की पुष्टि करें। सरकारी एजेंसियां (जैसे CBI, पुलिस) कभी वीडियो कॉल या चैट के जरिए “अरेस्ट” नहीं करतीं।
निजी जानकारी न दें: बैंक डिटेल्स, OTP, पासवर्ड या आधार नंबर जैसी जानकारी कभी साझा न करें।
शिकायत दर्ज करें: संदिग्ध कॉल/मैसेज की शिकायत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर करें।
जागरूक रहें: डिजिटल अरेस्ट के बारे में परिवार और दोस्तों को शिक्षित करें।
तुरंत कार्रवाई: धमकी मिलने पर घबराएं नहीं, स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन (1930) से संपर्क करें।
साइबर खतरों से बचने के उपाय:
मजबूत पासवर्ड: अनूठे, जटिल पासवर्ड बनाएं और नियमित बदलें। पासवर्ड मैनेजर का उपयोग करें।
दो-कारक प्रमाणीकरण (2FA): खातों में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए 2FA सक्रिय करें।
सावधान रहें: संदिग्ध लिंक, ईमेल या अटैचमेंट पर क्लिक न करें। फिशिंग हमलों से बचें।
सॉफ्टवेयर अपडेट: डिवाइस, ऐप्स और एंटीवायरस को नियमित अपडेट करें।
सुरक्षित नेटवर्क: सार्वजनिक वाई-फाई पर VPN का उपयोग करें और असुरक्षित नेटवर्क से बचें।
जागरूकता: संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें और व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सावधानी बरतें।