लखनऊ/तेल अवीव: यमन की राजधानी सना में 28 अगस्त 2025 को इजराइल एयर फोर्स द्वारा हूती विद्रोहियों की एक महत्वपूर्ण बैठक पर किए गए मिसाइल हमले की खबर की पुष्टि हो चुकी है, इजराइली स्रोतों के अनुसार, हमले में हूती प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी, रक्षा मंत्री मोहम्मद अल-अतिफी और चीफ ऑफ स्टाफ मुहम्मद अब्द अल-करिम अल-घमारी सहित कई वरिष्ठ नेता मारे गए। हालांकि, हूती समूह ने इन मौतों को “फर्जी खबर” बताकर खारिज किया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हमला सना के बेत बावस इलाके और प्रेसिडेंशियल पैलेस के पास एक अपार्टमेंट पर किया गया, जहां हूती नेता एकत्र थे। इजराइली इंटेलिजेंस (संभवतः मोसाद) से मिली रीयल-टाइम जानकारी के आधार पर यह सटीक हमला किया गया, लेकिन किसी “हूती गद्दार” की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई।
हूती और इजराइल की ओर से मिली प्रतिक्रियाएं :
हूती पक्ष: अल-मसिराह टीवी ने हमले को “सिविलियन टारगेट” बताया और मौतों से इनकार किया। हूती नेता ने कहा कि वे इजराइल पर जवाबी कार्रवाई करेंगे। फिलहाल 29 और 30 अगस्त तक कोई नए हमले की रिपोर्ट नहीं है।
इजराइली पक्ष: डिफेंस मिनिस्टर इजराइल काट्ज ने कहा, “हूथी नेता जो इजराइल पर हमला करते हैं, उनकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “क्षेत्रीय स्थिरता” के लिए जरूरी बताया। IDF ने 30 अगस्त तक कोई अतिरिक्त स्ट्राइक की घोषणा नहीं की।
सोशल मीडिया पर वायरल दावों में पूरी हूती कैबिनेट के मारे जाने की बात कही गई, जो अतिरंजित प्रतीत होती है।हमला हूथी द्वारा 27 अगस्त को इजराइल पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में था। इजराइली डिफेंस मिनिस्टर इजराइल काट्ज ने कहा कि हूथी नेताओं को हमलों की कीमत चुकानी पड़ेगी, जबकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी बताया।
हूती मीडिया अल-मसिराह ने हमले को “सिविलियन टारगेट” बताकर नकारा और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी। हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हौथी सुरक्षित थे, क्योंकि वे भाषण दे रहे थे।
मालूम हो कि यह हमला गाजा युद्ध (अक्टूबर 2023 से) के बाद तेज हुए इजराइल-हौथी संघर्ष का हिस्सा है। हूथी ने इजराइल पर 70 से अधिक हमले किए, जबकि इजराइल ने यमन में 16 से अधिक स्ट्राइक्स किए। रेड सी में शिपिंग प्रभावित हो सकती है, क्योंकि हूथी इरान-समर्थित हैं। 30 अगस्त तक कोई नया जवाबी हमला या मौतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई। बता दें कि न्यूजवीक, टाइम्स ऑफ इजराइल और अल जजीरा जैसे स्रोतों ने हमले की पुष्टि की, लेकिन कैजुअल्टी पर विवाद बना हुआ है।







