लखनऊ, 28 सितंबर 2025: उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बना टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) विवाद आज एक नया मोड़ ले चुका है। जनपद लखनऊ के मोहनलालगंज लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद माननीय श्री आर.के. चौधरी को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ लखनऊ ने एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित है और 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से छूट दिलाने की मांग करता है।
ज्ञापन सुधांशु मोहन की अध्यक्षता में सौंपा गया, जिसमें संघ के पदाधिकारियों ने अनुरोध किया कि सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल करे या शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में संशोधन कर अनुभवी शिक्षकों की नौकरी, प्रमोशन और गरिमा की रक्षा करे। सांसद चौधरी ने तत्काल पत्र लिखकर इसे प्रधानमंत्री को प्रेषित कर दिया और आश्वासन दिया कि संसद सत्र शुरू होते ही इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया जाएगा।

यह घटना तब महत्वपूर्ण हो जाती है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें कक्षा 1 से 8 तक के सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षक भी परीक्षा पास करें, अन्यथा उनकी सेवा समाप्त हो सकती है। हालांकि, रिटायरमेंट से 5 वर्ष से कम समय वाले शिक्षकों को छूट दी गई है, जबकि बाकी को 1 सितंबर 2027 तक परीक्षा पास करने का समय दिया गया है। इस फैसले ने उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश के लाखों शिक्षकों में चिंता की लहर पैदा कर दी, खासकर उनमें जो बिना टीईटी के वर्षों से सेवा दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में इस फैसले के खिलाफ शिक्षक संगठनों का आक्रोश चरम पर है। दो शिक्षकों की कथित आत्महत्या के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 सितंबर को बेसिक शिक्षा विभाग को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के निर्देश दिए थे। लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोई बड़ा अपडेट नहीं आया है। यूपी सरकार ने याचिका की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक इसे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नहीं किया गया है।
शिक्षक संघों का कहना है कि आरटीई एक्ट के तहत 2011 पूर्व नियुक्त शिक्षक छूट के हकदार हैं, और यह फैसला उनकी अनदेखी करता है। मोहनलालगंज जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में यह मुद्दा और संवेदनशील है, जहां सैकड़ों शिक्षक प्रभावित हैं।
ज्ञापन सौंपने के अवसर पर संघ के जिला कोषाध्यक्ष फहीम बेग, मलिहाबाद अध्यक्ष अवधेश कुमार, काकोरी अध्यक्ष अजय सिंह, माल अध्यक्ष प्रदीप सिंह, बीकेटी अध्यक्ष सावित्री मौर्या, चिनहट अध्यक्ष विजय कुमार, मोहनलालगंज अध्यक्ष आलोक शुक्ला सहित कई मंत्री, कोषाध्यक्ष और बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। अन्य प्रमुख नामों में बालमुकुंद यादव, लाल बहादुर यादव, रमेश चंद्र, कुलदीप सिंह यादव, विजय प्रकाश, जान्हवी शरण सिंह, अनिल सिंह, पृथ्वी पाल सिंह, अमरेश कुमार, विकास कुमार सचान, हिमांशु श्रीवास्तव, अमरचंद, संजय कुमार, मंजू कुमारी, निशा सिंह, शांता देवी, नीलम वर्मा, शैलेन्द्र सिंह, रवि शर्मा और विमल राज साहू शामिल थे।
शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि सांसद चौधरी का त्वरित समर्थन इस संघर्ष को नई दिशा देगा। अगले टीईटी परीक्षा 29-30 जनवरी 2026 को प्रस्तावित है, और तब तक राज्य सरकार की याचिका पर फैसला महत्वपूर्ण होगा। यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर बहस को तेज करने वाली साबित हो रही है।







