बिना बिजली के दीपावली मनाना न केवल परेशानी का विषय है, बल्कि यह “उपभोक्ता उत्पीड़न”: उपभोक्ता परिषद
लखनऊ, 28 सितंबर 2025: दीपावली और दशहरा जैसे प्रकाश पर्वों की रौनक में बिजली की रोशनी अनिवार्य है, लेकिन उत्तर प्रदेश में हजारों नए उपभोक्ता इस बार स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता से परेशान हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) से अपील की है कि त्योहारों को ध्यान में रखते हुए नए बिजली कनेक्शन तत्काल उपलब्ध कराए जाएं। परिषद ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर को नए कनेक्शन के लिए अनिवार्य करने के UPPCL के हालिया आदेश को न केवल नियमविरुद्ध बताया, बल्कि उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ भी करार दिया है।
वर्मा ने कहा कि पूरे प्रदेश में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग त्योहारों के लिए घर सजाने और रोशनी लगाने की तैयारी में हैं, लेकिन UPPCL की ओर से लगाई गई यह शर्त उन्हें महीनों इंतजार करा रही है। उन्होंने बताया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत करीब ₹6000 तक पहुंच गई है, जो सामान्य कनेक्शन शुल्क से 6 गुना महंगी है। ऊपर के उपभोक्ता परिषद ने इसे गरीबों पर बोझ बताते हुए मांग की है कि नए आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए और शुल्क को उचित स्तर पर लाया जाए।
विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने अभी तक स्मार्ट मीटर की दरें निर्धारित नहीं की हैं, जबकि कनेक्शन शुल्क कॉस्ट डाटा बुक के अनुसार पारदर्शी तरीके से तय होना चाहिए।परिषद ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए पहले ही UPERC में प्रस्ताव दाखिल कर हस्तक्षेप की मांग की है। वर्मा का कहना है कि बिना बिजली के दीपावली मनाना न केवल परेशानी का विषय है, बल्कि यह “उपभोक्ता उत्पीड़न” की श्रेणी में आता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मीटर कीमतें आयोग द्वारा तय न हों, तब तक इसे थोपना अविवेकपूर्ण है।
परिषद की मांग है कि पारंपरिक मीटरिंग के विकल्प उपलब्ध कराए जाएं और आदेश तुरंत वापस लिया जाए।यह विवाद ऐसे समय पर उभरा है जब UPPCL ने सितंबर 2025 में स्मार्ट मीटर को नए कनेक्शन के लिए अनिवार्य घोषित किया, जिसका उद्देश्य बिजली चोरी रोकना और राजस्व वृद्धि बताया गया। लेकिन उपभोक्ता संगठनों का तर्क है कि यह नीति बिना पर्याप्त बुनियादी ढांचे के लागू की जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से समस्या हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि UPERC ने हस्तक्षेप किया, तो त्योहारों से पहले राहत मिल सकती है।
प्रदेश में दीपावली की खरीदारी और सजावट जोरों पर है, और बिजली कनेक्शन की कमी इस खुशी को फीका कर सकती है। उपभोक्ता परिषद की यह मांग न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता की बहस को तेज कर रही है। UPPCL या सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि मांग पूरी न हुई, तो बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।







