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    Home»राजनीति

    मैथिली ठाकुर का टिकट: लोकप्रियता या सियासी दांव?

    ShagunBy ShagunOctober 16, 2025Updated:October 16, 2025 राजनीति No Comments4 Mins Read
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    Maithili Thakur's ticket: Popularity or political gamble?
    मैथिली ठाकुर का टिकट: लोकप्रियता या सियासी दांव
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    मैथिली ठाकुर के टिकट पर बवाल: क्या है बिहार की सियासत में नारी शक्ति की हकीकत?

    बिहार के दरभंगा जिले की अलीनगर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मशहूर लोक गायिका मैथिली ठाकुर को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन इस फैसले ने पार्टी के स्थानीय संगठन में हलचल मचा दी है। बीजेपी के सातों मंडल अध्यक्षों ने मैथिली के खिलाफ खुलकर नाराजगी जताई है और स्थानीय नेता संजय उर्फ पप्पू सिंह के पक्ष में अपनी राय दर्ज की है। मंडल अध्यक्षों का कहना है कि संगठन को मजबूत करने वाले कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर एक बाहरी चेहरे को टिकट देना स्वीकार्य नहीं है। यह विवाद बिहार की सियासत में महिलाओं की भूमिका और उनके प्रति दलों के रवैये पर सवाल उठाता है।

    मैथिली ठाकुर का टिकट: लोकप्रियता या सियासी दांव?

    मैथिली ठाकुर, जिन्होंने अपनी मधुर मैथिली और भोजपुरी गायिकी से देश-विदेश में ख्याति कमाई, अब सियासत के मैदान में उतरी हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह उनकी अपनी मर्जी है या उनकी लोकप्रियता को वोट में बदलने का सियासी दांव? स्थानीय बीजेपी नेताओं का आरोप है कि पार्टी ने कार्यकर्ताओं की मेहनत को दरकिनार कर एक सेलिब्रिटी चेहरे को चुना, जो क्षेत्र की जमीनी हकीकत से अनजान है। कुछ यूजर्स ने लिखा, “मैथिली की कला को सियासत में खींचना उनकी प्रतिभा का अपमान है।” वहीं, कुछ ने इसे नई पीढ़ी को मौका देने का कदम बताया।

    Maithili Thakur's ticket: Popularity or political gamble?
    मैथिली ठाकुर का टिकट: लोकप्रियता या सियासी दांव

    महिला सशक्तिकरण या वोट बैंक की रणनीति?

    2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) को सियासत में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने का बड़ा कदम बताया गया था। लेकिन बिहार जैसे राज्यों में इसकी हकीकत कुछ और दिखती है। राजनीतिक दलों पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वे महिलाओं को वोट बैंक के रूप में देखते हैं, न कि नेतृत्व की भूमिका में। हाल के वर्षों में, खासकर चुनावों से पहले, महिलाओं के खातों में नकद राशि डालने की योजनाएँ आम हो गई हैं। उदाहरण के लिए, बिहार में हाल ही में नीतीश सरकार ने स्वरोजगार के नाम पर महिलाओं को 10,000 रुपये की राशि दी, जिसके लिए 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन सवाल उठता है: क्या यह सशक्तिकरण है या वोट हासिल करने का हथकंडा?

    https://x.com/i/status/1978822468501397881

    X पर एक यूजर ने लिखा, “चुनाव से पहले रेवड़ियाँ बाँटना सशक्तिकरण नहीं, बल्कि प्रलोभन है।” कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि इन योजनाओं के बाद कोई समीक्षा क्यों नहीं होती कि महिलाओं ने इस राशि से स्वरोजगार में कितनी प्रगति की? बेरोजगारी के इस दौर में पुरुषों के लिए ऐसी योजनाएँ क्यों नहीं बनतीं?

    maithli thakur-Bihar
    मैथिली ठाकुर: 2017 में ‘राइजिंग स्टार’ रियलिटी शो में फाइनलिस्ट बनने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हुईं

    सियासत में महिलाएँ: सम्मान या इस्तेमाल?

    महिलाओं को सियासत में हिस्सेदारी देने की बात तो होती है, लेकिन हकीकत में उनकी भागीदारी 15% से भी कम है। बिहार के मौजूदा चुनाव में सभी दलों ने मिलकर 15% से कम टिकट महिलाओं को दिए हैं। मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री के लिए किसी महिला चेहरे को आगे नहीं किया गया। पंचायती राज में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, लेकिन वहाँ भी अक्सर पुरुष परिजन डमी उम्मीदवारों के जरिए सत्ता पर काबिज रहते हैं। महिलाओं को प्रलोभन का आसान शिकार मानने की सोच भी सियासत में गहरी है। शिक्षा और प्रतिभा में पुरुषों को पीछे छोड़ने वाली महिलाओं को क्या वोट की ताकत का अहसास नहीं? फिर भी, दलों का फोकस रेवड़ियाँ बाँटने पर ज्यादा है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी ऐसी योजनाएँ देखने को मिलती हैं, जिन पर चुनाव आयोग या न्यायालय का ध्यान कम ही जाता है।

    मैथिली जैसे टैलेंट का सियासी इस्तेमाल?

    मैथिली ठाकुर का उदाहरण सियासत में महिलाओं और उनकी प्रतिभा के इस्तेमाल का जीता-जागता सबूत है। उनकी गायिकी ने बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच दिया, लेकिन सियासत में लाकर क्या उनकी कला को नुकसान नहीं होगा? ऐसे कई उदाहरण हैं, जहाँ अभिनेताओं, गायकों और खिलाड़ियों को उनकी लोकप्रियता के लिए सियासत में खींचा गया, जिससे उनकी मूल प्रतिभा प्रभावित हुई।

    महिला आरक्षण बिल के बाद भी दलों की टिकट वितरण नीति में बदलाव नहीं दिखता। क्या यह बिल केवल दिखावे के लिए था? मैथिली ठाकुर जैसे नामों को सियासत में लाना क्या उनकी प्रतिभा का सम्मान है या वोट बैंक की खातिर उनका उपयोग? ये सवाल बिहार की सियासत को कटघरे में खड़ा करते हैं।

    X पर #MaithiliThakur और #BiharElections हैशटैग के साथ इस मुद्दे पर चर्चा जोरों पर है। इस सियासी ड्रामे का अगला अध्याय क्या होगा, यह देखना बाकी है।  लेखक – दिलीप राय शर्मा

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