मुंबई, 23 नवंबर 2025
बॉलीवुड के दिग्गज खलनायक रज़ा मुराद आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। 1950 में जन्मे रज़ा साहब ने 200 से ज़्यादा फ़िल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को हैरान-परेशान किया है। रामायण में विविशन, सदाशिव अमरापुरकर के साथ गैंगस्टर रोल्स से लेकर हाल की वेब सीरीज़ तक – रज़ा मुराद का हर किरदार यादगार रहा है।
जन्मदिन के मौके पर सोशल मीडिया पर फैंस बधाइयाँ दे रहे हैं, तो पुरानी यादें भी ताज़ा हो रही हैं। उनमें सबसे मशहूर है वो कथित “राजेश खन्ना थप्पड़ कांड” जिसने 70 के दशक में अख़बारों की सुर्खियाँ बटोरी थीं।

क्या हुआ था उस दिन?
उस ज़माने का एक मशहूर तड़का अख़बार ‘उर्वशी’ ने छापा था:
“डिंपल कपाड़िया और रज़ा मुराद एक ही कार में फ़िल्म सिटी पहुँचे। वहाँ राजेश खन्ना अपनी फ़िल्म की शूटिंग कर रहे थे। डिंपल को रज़ा मुराद के साथ देखते ही काका भड़क उठे और सबके सामने रज़ा मुराद को ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया!”
ये खबर उस वक्त आग की तरह फैल गई थी। वजह साफ थी. राजेश खन्ना और डिंपल कपाड़िया उस वक्त डेटिंग कर रहे थे (शादी से पहले का दौर) और बॉलीवुड में लव ट्रायंगल की अफवाहें हमेशा मसाला देती रही हैं।
लेकिन सच क्या था?
साल 2024 में एक इंटरव्यू में रज़ा मुराद ने हँसते-हँसते इस पूरे किस्से को सिरे से खारिज कर दिया था। उनके शब्दों में:
“ये बिल्कुल झूठ, बकवास और बेबुनियाद खबर थी। ना मैं कभी डिंपल जी के साथ फ़िल्म सिटी गया, ना राजेश भाई ने कभी मुझ पर हाथ उठाया। काका और मेरे रिश्ते हमेशा बहुत अच्छे रहे। हमने कई फ़िल्में साथ कीं। उस खबर को लिखने वाले पत्रकार को मैं एक पार्टी में मिला भी था, लेकिन मैंने कुछ कहा नहीं। बोलता तो शायद हाथापाई हो जाती… मैं इन लफड़ों से दूर ही रहता हूँ।”
रज़ा साहब ने मुस्कुराते हुए कहा था, “बॉलीवुड में तो बिकने के लिए मसाला चाहिए था ना, बस बना दिया।”आज जब रज़ा मुराद 75 के हो रहे हैं, ये किस्सा फिर वायरल हो रहा है।
रज़ा मुराद @ 75: वो छोटा-सा रोल जिसने खलनायक की पूरी गली खोल दी!
फ़िल्म: जानी दुश्मन (1979)
निर्देशक: राजकुमार कोहली रज़ा मुराद का रोल सिर्फ़ 5-6 सीन का था – एक राक्षस बना इंसान। लेकिन जिस तरह उन्होंने वो डायलॉग बोला:
“मैं जानी दुश्मन हूँ… तेरी जान का दुश्मन!”
और वो खौफ़नाक हँसी… बस पूरी सिनेमा हॉल में सन्नाटा छा जाता था! राजकुमार कोहली ने बाद में बताया था –
“मैंने रज़ा को सिर्फ़ एक सीन के लिए बुलाया था, लेकिन उस एक सीन ने उसे स्टार खलनायक बना दिया।” जानी दुश्मन के बाद रज़ा मुराद को लगातार बड़े-बड़े खलनायकी रोल मिलने शुरू हो गए- गैंगस्टर, तानाशाह, स्मगलर, पिता से लेकर भाई तक, हर रंग में वो छा गए। एक छोटा रोल… और ज़िंदगी भर के लिए खलनायक का ताज!

नमक हराम से “मैं शायर तो नहीं” तक – राजेश खन्ना और रज़ा मुराद का अनोखा कॉकटेल
1973 – नमक हराम
राजेश खन्ना और रज़ा मुराद पहली बार साथ।
रज़ा का रोल: ट्रेड यूनियन लीडर का साथी – सीधा-सादा, दोस्ती निभाने वाला किरदार।
काका और रज़ा के कई इमोशनल सीन थे। दोनों की बॉन्डिंग सेट पर भी गज़ब की थी।

फिर आए 80-90 का दौर…
अब काका हीरो, रज़ा खलनायक!
दोनों ने दर्जनों फ़िल्मों में एक-दूसरे के आमने-सामने दमदार सीन किए।
और आख़िरी बार कैमरे पर साथ आए:
फ़िल्म: मैं शायर बदनाम (दिसंबर 2012 शूट, रिलीज़ नहीं हुई)
राजेश खन्ना की आख़िरी फ़िल्मों में से एक।
रज़ा मुराद ने बताया था –
“काका बहुत बीमार थे, लेकिन सेट पर आकर बोले – ‘रज़ा, आज फिर पुराने दिन याद कर लेते हैं।’
हमने एक लंबा सीन एक ही टेक में शूट किया… वो आख़िरी बार था जब हमने साथ काम किया।”नमक हराम का दोस्त… से मैं शायर बदनाम का आख़िरी साथी – काका और रज़ा की जोड़ी को सलाम!
फैंस लिख रहे हैं – “जो थप्पड़ कभी पड़ा ही नहीं, वो आज भी सबसे मशहूर थप्पड़ है बॉलीवुड का!”रज़ा मुराद को जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएँ।
लंबी उम्र हो, सेहत अच्छी रहे और ऐसे ही दमदार रोल करते रहें। आप जैसे कलाकार सदी में एक बार आते हैं।
जय हिंद!






