बेटी के हौसले को सलाम: राजकुमारी पढ़ना चाहती है, दुष्ट कॉलेज/स्कूल प्रशासन नीचता की पराकाष्ठा है
मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक नन्ही छात्रा के जज्बे ने सबको हैरान कर दिया। चिचोली विकासखंड के ग्राम चूनाहजुरी में रहने वाली सुरभि यादव (उम्र करीब 10-11 साल, कक्षा 5वीं या 6वीं) को निजी स्कूल की बस में नहीं बैठने दिया गया क्योंकि उसकी ट्रांसपोर्ट फीस बकाया थी। बस चालक ने अन्य बच्चों को तो बस में चढ़ाया, लेकिन सुरभि को उतार दिया (या बैठने से मना कर दिया)।
नाराज सुरभि ने हार नहीं मानी। उसने अपना स्कूल बैग लेकर सड़क पर बस के सामने ही धरना दे दिया। घंटों बैठी रही, जिससे सड़क पर जाम लग गया और यातायात प्रभावित हुआ। राहगीरों ने बच्ची का हौसला देखकर तारीफ की, जबकि कुछ ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है।

घटना की सूचना मिलते ही चिचोली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बच्ची और उसके परिजनों से बात की, समझाइश दी और सड़क से हटाया। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि सुरभि RTE (राइट टू एजुकेशन) के तहत मुफ्त पढ़ाई कर रही है, लेकिन बस फीस अलग से लगती है, जो पिछले कुछ समय से बकाया है (करीब 42,000 रुपये का दावा)। परिजनों ने स्कूल पर मनमानी का आरोप लगाया है।
वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – https://x.com/i/status/2002944619655627022
लोगों की प्रतिक्रियाएं:
एक यूजर ने लिखा: “सिस्टम निम्नता के स्तर छू रहा है। स्कूल लूट का अड्डा बन गए हैं।”
नीरज: “राजकुमारी पढ़ना चाहती है, दुष्ट कॉलेज/स्कूल प्रशासन नीचता की पराकाष्ठा है।”
विपुल यादव: “सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए, प्राइवेट स्कूल का यही हाल है – लूट का अड्डा बना दिया शिक्षा के नाम पर।”
यह घटना एक बार फिर निजी स्कूलों में फीस विवाद और RTE नियमों की अनदेखी पर सवाल उठा रही है। सुरभि का यह मासूम विरोध शिक्षा के अधिकार की लड़ाई का प्रतीक बन गया है। बेटी के इस जज्बे को लाखों लोग सलाम कर रहे हैं!







