मंत्री भड़के, पत्रकार अडिग: ‘घंटा’ वाला विवाद वायरल, अनुराग द्वारी के सवाल पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा – “फोकट के सवाल मत पूछो… घंटा!”
पत्रकारिता की जीत: अनुराग ने दिखाया असली हौसला, मंत्री के अपशब्द पर तुरंत विरोध, सोशल मीडिया पर तारीफों की बौछार
इंदौर। भारत के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में 7 साल से नंबर-1 रहने वाला इंदौर अब एक भयानक संकट में फंस गया है। भगीरथपुरा इलाके में सीवर लाइन लीक होने से दूषित पानी सप्लाई में मिल गया, जिससे कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई और 150 से ज्यादा बीमार पड़ गए।
लेकिन जब इस मुद्दे पर एनडीटीवी के पत्रकार अनुराग द्वारी ने मध्य प्रदेश के शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल किया, तो मंत्री ने सवालों को ‘फोकट’ बताते हुए ‘घंटा’ जैसे अपशब्द का इस्तेमाल किया। यह पूरी घटना वीडियो में कैद हो गई, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और देशभर में हंगामा मचा दिया।
घटना की पूरी कहानी: सवाल पर भड़के मंत्री
31 दिसंबर 2025 को ‘सिल्वर जुबली रीयूनियन ऑफ एमबीबीएस बैच 2000’ कार्यक्रम के बाहर अनुराग द्वारी ने मंत्री से पूछा कि दूषित पानी से मौतों के लिए कौन जिम्मेदार है और मुआवजे का क्या इंतजाम है। मंत्री ने जवाब में कहा, “फोकट के सवाल मत पूछो… तू क्या घंटा होके आया है?” यह शब्द हिंदी में एक अपमानजनक अर्थ रखता है, जो सवालों को पूरी तरह खारिज कर देता है।
पत्रकार ने तुरंत विरोध जताया और कहा, “सर, अपनी भाषा सुधारिए… घंटा क्या शब्द है?” बहस गर्म हो गई, लेकिन अनुराग ने अपना रुख नहीं छोड़ा। बाद में मंत्री ने अपने व्यवहार पर माफी मांगी और कहा कि वे भावुक हो गए थे।
मंत्री की माफी, लेकिन सवाल बरकरार : बाद में माफी मांगी, पर लोग पूछ रहे – मुआवजा कब? जिम्मेदारी किसकी?
यह घटना इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में हुई, जहां सीवर और पानी की पाइपलाइन लीक होने से बैक्टीरिया और प्रदूषण पानी में घुल गया। इससे डायरिया का प्रकोप फैला, जिसमें बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
विपक्षी कांग्रेस ने इसे सरकार की लापरवाही बताया और मंत्री पर हमला बोला। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा, “यह मंत्री की असंवेदनशीलता दर्शाता है।”
वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें – https://x.com/i/status/2006401457512452457
दूषित पानी का संकट: कितना बड़ा?

इंदौर, जो स्वच्छ भारत अभियान का चेहरा है, अब इस संकट से जूझ रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कम से कम 3 मौतें प्राकृतिक हो सकती हैं, लेकिन बाकी दूषित पानी से जुड़ी हैं। मंत्री विजयवर्गीय ने मौतों की संख्या पर ‘कन्फ्यूजन’ जताया और कहा कि जांच से साफ होगा।
स्थानीय लोग शिकायत कर रहे हैं कि जोजरी नदी में केमिकल प्रदूषण पानी सप्लाई को प्रभावित कर रहा है। सरकार ने जांच कमेटी बनाई है और प्रभावितों को मदद का वादा किया है, लेकिन लोग कहते हैं कि कार्रवाई में देरी हो रही है।
सोशल मीडिया पर उबाल: पत्रकार की तारीफ, मंत्री की निंदा

वीडियो वायरल होने के बाद एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अनुराग द्वारी की बहादुरी की सराहना हुई।
- थार डेजर्ट फोटोग्राफी ने लिखा, “पत्रकारों से निवेदन है कि ऐसे ही सवाल दागें… मौतें हुई हैं तो सवाल पूछना पड़ेगा।”
- अभिनव पांडेय ने कहा, “नेताओं को मीठे सवालों की आदत हो गई… सही आईना दिखाया।”
- ममता राजगढ़ ने टिप्पणी की, “आप ने आज पत्रकारिता को जिंदा कर दिया।”
कई यूजर्स ने मंत्री की भाषा को ‘अशोभनीय’ बताया और कहा कि नेताओं को जवाबदेही सीखनी चाहिए। हालांकि, कुछ समर्थकों ने मंत्री का बचाव किया कि पत्रकार ने ‘उकसाया’। कुल मिलाकर, यह घटना पत्रकारिता की ताकत और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस छेड़ गई है।
सरकार ने जांच का ऐलान किया है
सरकार ने जांच का ऐलान किया है, लेकिन स्थानीय निवासी मुआवजे और तत्काल सुधार की मांग कर रहे हैं। अनुराग द्वारी ने कहा, “सवाल पूछना हमारा काम है, और हम जारी रखेंगे।”
यह मामला न सिर्फ इंदौर की स्वच्छता की पोल खोलता है, बल्कि दिखाता है कि सत्ता में बैठे लोग सवालों से कितना घबराते हैं। क्या मंत्री की माफी काफी है, या सख्त कार्रवाई होनी चाहिए? आपकी राय क्या है?






