नई दिल्ली, 28 मार्च 2026: महंगी किताबों और ड्रेस का मुद्दा अब पूरे देश में राष्ट्रीय बहस बन गया है। टीवी डिबेट, अखबारों की सुर्खियां और सोशल मीडिया पर हर तरफ अभिभावक अपनी परेशानी बता रहे हैं। आज इसी मुद्दे पर लोकसभा में सांसद इकरा हसन ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर हमला बोला।
सांसद का सीधा आरोप : अभिभावकों को महंगी खरीदारी के लिए मजबूर करते हैं

इकरा हसन ने सदन में कहा, “कई प्राइवेट स्कूल किताबों और ड्रेस के लिए सिर्फ एक दुकानदार तय कर देते हैं और अभिभावकों को महंगी खरीदारी के लिए मजबूर करते हैं। यह बिल्कुल गलत है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्कूलों की यह कार्रवाई अभिभावकों के पैसे की लूट है।
मांग: बनेगा डेडिकेटेड शिकायत पोर्टल
सांसद ने सरकार से तुरंत एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बनाने की मांग की, जहां अभिभावक सीधे शिकायत दर्ज करा सकें। उनका कहना है कि इससे समस्या का तेजी से समाधान होगा और स्कूलों पर लगाम लगेगी।
क्यों गरमा रहा है मुद्दा?
अभिभावक बता रहे हैं कि नर्सरी से लेकर 12वीं तक एक साल में किताब-ड्रेस पर 15-25 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं।
कई स्कूल एक ही वेंडर से 2-3 गुना महंगे दाम वसूलते हैं।
सोशल मीडिया पर हजारों पोस्ट और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां मां-बाप अपनी कहानी साझा कर रहे हैं।
अभी क्या? : सदन में यह आवाज उठने के बाद अब शिक्षा मंत्रालय और राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ गया है। अभिभावक उम्मीद जता रहे हैं कि जल्द ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।क्या प्राइवेट स्कूलों की यह मनमानी अब रुकेगी? सबकी नजरें सरकार के अगले एक्शन पर टिकी हैं।






