एक्सेलरेट 2026 सम्मेलन में उभरा भारत को विश्व का पसंदीदा निवेश डेस्टिनेशन बनाने का रोडमैप
मुंबई: बदलते और उतार-चढ़ाव वाले बाजार में निवेशकों को संतुलित रिटर्न देने के लिए फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया ने अपना पहला स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) — सफायर इक्विटी लॉन्ग शॉर्ट एसआईएफ लॉन्च किया है। यह फंड क्वांटिटेटिव रणनीति पर आधारित है, जो 40 से अधिक फैक्टर्स के आधार पर स्टॉक्स का स्कोरिंग और रैंकिंग करता है।
फंड निफ्टी 500 यूनिवर्स में लार्ज, मिड और स्मॉल कैप सेगमेंट में विविधता के साथ निवेश करेगा तथा नेट एसेट्स का अधिकतम 25% तक शॉर्ट पोजीशन ले सकता है। इससे गिरावट वाले बाजार में जोखिम को नियंत्रित करते हुए बेहतर रिटर्न देने का लक्ष्य है।
फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया के प्रेसिडेंट अविनाश सतवालकर ने कहा, “आज के तेजी से बदलते बाजार में अनुशासित और लचीली रणनीतियां जरूरी हैं। यह फंड उन निवेशकों के लिए है जो नियंत्रित जोखिम के साथ अधिक रिटर्न की तलाश करते हैं।” पोर्टफोलियो मैनेजर अरिहंत जैन ने बताया कि क्वांट मॉडल बाजार की स्थितियों के अनुसार खुद को ढालते हुए लॉन्ग और शॉर्ट दोनों पोजीशन से संतुलित अवसर पैदा करता है।
रियल एस्टेट सेक्टर में नया भरोसा
दूसरी ओर, मुंबई में आयोजित एक्सेलरेट 2026 सम्मेलन में रियल एस्टेट सेक्टर के भविष्य पर चर्चा हुई, जहां 750 से अधिक उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन में साफ हुआ कि भारत का रियल एस्टेट अब पारंपरिक फंडिंग से आगे बढ़कर रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs), स्मॉल-एंड-मीडियम ट्रस्ट और प्राइवेट इक्विटी जैसे संस्थागत वित्तीय माध्यमों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि 2047 तक भारत का शहरीकरण करीब 50% पहुंच सकता है, जिससे रियल एस्टेट की मांग में बड़ा बदलाव आएगा। प्रशांत शर्मा ने रेरा, जीएसटी और आरबीआई की नीतियों को पारदर्शिता और निवेशकों के विश्वास का आधार बताया।
विकास जैन के अनुसार घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा अपने चरम पर है। सम्मेलन में ब्रांडेड रेजिडेंसेज, हॉस्पिटैलिटी एसेट्स, ग्रीन डेवलपमेंट और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों को सेक्टर के भविष्य का मुख्य इंजन बताया गया।
फ्रैंकलिन का नया लॉन्ग-शॉर्ट फंड और एक्सेलरेट 2026 सम्मेलन दोनों ही संकेत देते हैं कि भारतीय बाजार और रियल एस्टेट सेक्टर अब परिपक्व, पारदर्शी और वैश्विक स्तर पर आकर्षक निवेश गंतव्य बन चुके हैं, जहां सही रणनीति और नीतिगत सहयोग के साथ गिरावट में भी कमाई के मजबूत अवसर मौजूद हैं।






