भारत पर हीट डोम का कहर! दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 92 भारतीय, प्रदेश में आगामी 26 अप्रैल तक उष्ण लहर/लू के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उष्ण रात्रि के उपरांत छिटपुट वर्षा से आंशिक राहत की सम्भावना
नई दिल्ली : भीषण गर्मी का हीट डोम भारत पर छाया हुआ है। वर्तमान में दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 92 भारत के हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के कई शहर 44-45°C तक पहुंच गए हैं। यह गर्मी इतनी पहले कभी नहीं आई थी और कृषि चक्र को पूरी तरह बिगाड़ रही है।
100 करोड़ से ज्यादा लोगों पर खतरा, संयुक्त राष्ट्र की बड़ी चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी अब वैश्विक खाद्य प्रणाली को तबाही के कगार पर ला खड़ी कर रही है। इससे एक अरब से ज्यादा लोगों की आजीविका और स्वास्थ्य पर सीधा संकट मंडरा रहा है। हर साल आधा ट्रिलियन काम के घंटे बर्बाद हो रहे हैं।
एफएओ अधिकारी का अलर्ट: गर्मी तय कर रही है क्या और कब उगाया जाए
FAO के जलवायु परिवर्तन कार्यालय प्रमुख कावेह जाहेदी (Kaveh Zahedi) ने कहा, “भीषण गर्मी अब कृषि का स्क्रिप्ट ही बदल रही है। किसान क्या उगा सकते हैं, कब काम कर सकते हैं और कई मामलों में पुरानी फसलें भी नहीं बचा पाएंगे।” गर्मी सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं — समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी खतरे में है। 2024 में दुनिया के 91% महासागरों ने समुद्री लू का सामना किया, जिससे पानी में ऑक्सीजन कम हो रहा है और मछलियां मर रही हैं।
चार प्रमुख फसलों पर भारी असर, पैदावार में 6% की कमी प्रति डिग्री
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक औसत तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी से मक्का, चावल, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में औसतन 6 प्रतिशत की कमी आती है। अगर तापमान 1.5 डिग्री के बजाय 3 डिग्री बढ़ गया तो भीषण गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना तक बढ़ सकती है। 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक साबित हो रहा है।
चार प्रमुख फसलों पर भारी असर, पैदावार में 6% की कमी प्रति डिग्री
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक औसत तापमान में हर 1 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी से मक्का, चावल, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में औसतन 6 प्रतिशत की कमी आती है। अगर तापमान 1.5 डिग्री के बजाय 3 डिग्री बढ़ गया तो भीषण गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना तक बढ़ सकती है। 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक साबित हो रहा है।
समाधान का रास्ता: प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली जरूरी
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि किसानों को सटीक मौसम डेटा समय पर उपलब्ध कराया जाए ताकि वे बुवाई, सिंचाई और कटाई का समय बदल सकें। जलवायु अनुकूल फसलें, बेहतर सिंचाई और छाया वाले ढांचे जैसे उपायों से नुकसान कम किया जा सकता है।
स्थिति गंभीर, लेकिन चेतावनी समय पर आई
भारत में इस समय चल रही गर्मी न सिर्फ लोगों को तपा रही है बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए भी खतरे की घंटी बजा रही है। FAO-WMO रिपोर्ट साफ संकेत दे रही है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग पर काबू नहीं किया गया तो आने वाले सालों में फसलें, मछली पालन और पशुपालन और भी बुरी तरह प्रभावित होंगे।
भीषण गर्मी से बचाव के मुख्य विकल्प –
FAO-WMO रिपोर्ट के अनुसार किसानों के लिए तत्काल उपाय:
- गर्मी सहनशील फसलें अपनाएं
हीट-टॉलरेंट बीज और किस्में चुनें (गेहूं, चावल, मक्का आदि के लिए)। फसल विविधीकरण करें। - बुवाई का समय बदलें
प्लांटिंग विंडो एडजस्ट करें – गर्मी के पीक से बचें। - फसल प्रबंधन सुधारें
मल्चिंग से मिट्टी की नमी बचाएं।
शेड नेट, कपड़ा या सोलर पैनल से छाया दें।
सिंचाई ठंडे समय में करें। - प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का इस्तेमाल
IMD की मौसम एडवाइजरी और अलर्ट समय पर लें – बुवाई, सिंचाई और काम का समय बदलें।
पशु और मछली पालन में सावधानी
छाया और पानी उपलब्ध रखें। ठंडे समय में चारा दें। - वित्तीय सुरक्षा
फसल बीमा (PMFBY) कराएं। सरकारी सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का फायदा लें।
लंबे समय का समाधान:
क्लाइमेट-स्मार्ट खेती अपनाएं + ग्लोबल वार्मिंग कम करने के प्रयास करें।ये उपाय अपनाकर नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है। अभी तैयारी शुरू करें!







