असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा!
कटिहार (बिहार) : सरकारी तंत्र की निष्ठुरता की तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। बीमार होने के बावजूद आंगनबाड़ी सेविका को अपनी बीमारी का “सबूत” देने के लिए हाथ में ड्रिप चढ़ाकर केंद्र पहुंचना पड़ा। अधिकारी को यकीन नहीं हुआ, तो पति के कंधे का सहारा लेकर कांपते हुए कदमों से हाजिर हुई सेविका।
वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर आक्रोश
इस दर्दनाक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सेविका की हालत देखकर किसी का भी दिल पिघल जाए। बीमारी के बावजूद ड्यूटी से समझौता न करने वाली इस महिला की मजबूरी ने बिहार के कटिहार जिले में सिस्टम की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया है।
क्या बोले लोग इस असंवेदनशीलता पर :
अभिजीत गुप्ता : देश में दो ही जाति है…एक व्यवस्था में शामिल अभिजात्य वर्ग और दूसरा हमसब जनता यानी दलित वर्ग! अभिजात्य वर्ग हर तरह से आपका शोषण करने का अधिकार रखता है और इनपे सख्त कारवाही, सजा कभी नहीं होती! जबकि जनता यानी दलित वर्ग पर हर तरह की जुल्म, अत्याचार होना आम बात है!
मुस्तकीम आलम : यदि अधिकारी को यक़ीन नहीं था,तो उन्हें खुद आंगनबाड़ी सेविका के घर जाकर सच्चाई को सत्यापित करते।धीरे-धीरे इंसान अपने मानवीय मुल्यों को खोता जा रहा है।बैंक पदाधिकारियों को भी लाभार्थियों के घरों में जाकर जिंदा होने के सबूत अपनी आंखों से देखना चाहिए,नकि स्ट्रेचर-व्हील चेयर पर बुलाएं।
सुजैन : इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि हाल ही में एक अधिकारी ने एक कर्मचारी से मासिक धर्म का सबूत मांगा। भारत की सबसे खराब व्यवस्था। भगवान भारत की रक्षा करें।
हितेंद्र कुमार : मेरी मां को भी कैंसर इलाज के दौरान शासकीय विद्यालय में अध्यापन हेतू जाना पड़ता था ।
जनता का सवाल: क्या इतनी बीमारी में भी ड्यूटी पर आने का “प्रूफ” चाहिए होता है? या फिर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की जान की कोई कीमत नहीं?






