हरैया (बस्ती) में सरयू नहर सूखी पड़ी, जानवर तड़प रहे! खंड-4 का खोखला दावा
लखनऊ : हरैया तहसील क्षेत्र में भीषण गर्मी ने सब कुछ झुलसा दिया है, लेकिन सरयू नहर खंड-4 की हकीकत और भी चौंकाने वाली है। वो नहरें जो खेतों को हरा-भरा बनाने और बेजुबान जीव-जंतुओं को जीवन देने वाली थीं, आज सिर्फ कागजी दिखावा बनकर रह गई हैं। नहरों में पानी का नामोनिशान नहीं, सूखी खाइयां दूर-दूर तक फैली हुई हैं।
तेज धूप में बदतर होते हालात
प्यास से तड़पते पशु-पक्षी पानी की तलाश में भटक रहे हैं। गन्ने की फसलें सूखकर खराब हो रही हैं, किसान हाथ मलते रह गए हैं। हर साल अधिकारियों के दावे सुनने को मिलते हैं कि नहर में पानी छोड़ दिया गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। स्थानीय लोग कहते हैं – “कागजों पर सब कुछ ठीक, लेकिन हकीकत में सूखा ही सूखा!”किसानों और पशुओं की पुकारखेतों में गन्ना सूख रहा है, सिंचाई का कोई इंतजाम नहीं।
बेजुबान जानवर प्यास से बिलबिला रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं, कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। स्थानीय लोगों की मांग है कि तत्काल सरयू नहर खंड-4 में पानी छोड़ा जाए और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। क्या यह सिर्फ एक और सरकारी घोटाला है या फिर वाकई में प्रशासन की अनदेखी?
सवाल उठता है – पूर्वांचल की इस राष्ट्रीय परियोजना को किसके लिए बनाया गया था? कागजों पर सिंचाई का सपना या जमीनी हकीकत में सूखा? फिलहाल इस मामले में प्रशासन से जवाब की प्रतीक्षा है।







