‘स्पोर्ट्स फॉर ऑल’ के तहत इंडिया ऑटिज्म सेंटर ने न्यूरोडाइवर्स एथलीटों को किया सम्मानित
नई दिल्ली: विश्व ऑटिज्म जागरूकता माह के दौरान इंडिया ऑटिज्म सेंटर (IAC) ने एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल ‘स्पोर्ट्स फॉर ऑल’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य खेलों में पूर्ण समावेश सुनिश्चित करना है, ताकि न्यूरोडाइवर्स (ऑटिज्म और अन्य न्यूरोडेवलपमेंटल स्थितियों वाले) बच्चे और युवा भी बिना किसी भेदभाव के खेल सकें।
9 से 11 साल के चार तैराकों ने पाल्क जलडमरूमध्य में 60 किमी की चुनौतीपूर्ण रिले पूरी की
कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत थी चार युवा न्यूरोडाइवर्स तैराकों का सम्मान –
- मेका श्री अश्वथ (11 वर्ष)
- गुंटूरु लव (9 वर्ष)
- गुंटूरु कुश (9 वर्ष)
- थानवेश नवीन (10 वर्ष)
इन चारों बच्चों ने मात्र 18 घंटे में तमिलनाडु के धनुषकोडी से श्रीलंका के तलाईमन्नार तक और वापस 60 किलोमीटर की ओपन-वॉटर रिले तैराकी पूरी कर इतिहास रच दिया। यादवी स्पोर्ट्स एकेडमी फॉर स्पेशल नीड्स के कोच सतीश सियावकुमार के मार्गदर्शन में इन बच्चों ने पूल से शुरू करके समुद्री तैराकी तक की कठिन यात्रा तय की। इनकी उपलब्धि सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और अनुशासन का अद्भुत उदाहरण है।
समावेशी खेल इकोसिस्टम पर हुई गहन चर्चा
इस मौके पर ‘एक समान खेल इकोसिस्टम का निर्माण: प्रशिक्षण, CSR और नीति के बीच सेतु’ विषय पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। चर्चा का संचालन निपुण मल्होत्रा (निप्मन फाउंडेशन) ने किया। इसमें सोनाली फिलिप (GoSports), सुवर्णा राज, दामिनी घोष (Vidhi Centre) और आदित्य केवी (Umoya Sports) जैसे विशेषज्ञों ने भाग लिया।
स्पेशल ओलंपिक्स भारत की अध्यक्ष डॉ. मल्लिका नड्डा और स्पेशल ओलंपिक्स गुजरात की संरक्षक श्रीमती गीता मंडाविया ने सम्मान समारोह की अध्यक्षता की। इंडिया ऑटिज्म सेंटर के CEO श्री जयशंकर नटराजन, सुश्री सखी सिंघी और द क्वांटम हब के रोहित कुमार भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
खेल बदल सकता है ज़िंदगी – IAC CEO का संदेशइंडिया ऑटिज्म सेंटर के CEO जयशंकर नटराजन ने कहा, “खेल में आत्मविश्वास, लचीलापन, अनुशासन और अपनेपन की गहरी भावना को बढ़ावा देने की अद्भुत शक्ति है। आज जिन युवा एथलीटों को सम्मानित किया गया, वे इस बात का प्रमाण हैं कि सही मौका और सहयोग मिलने पर क्या-कुछ संभव हो जाता है।”
डॉ. मल्लिका नड्डा ने जोर देते हुए कहा कि समावेशी खेल संस्कृति बनाने के लिए सभी संस्थानों, नीति-निर्माताओं और समुदायों के सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
यह कार्यक्रम केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि यह एक सशक्त संदेश था – क्षमता हर बच्चे में होती है, बस सही मंच और समर्थन की जरूरत है। इंडिया ऑटिज्म सेंटर अपनी ‘समावेश’ पहल के जरिए ऐसे समावेशी और टिकाऊ इकोसिस्टम बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।







