लखनऊ, 5 जून 2026 : आगामी मानसून को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) और भारतीय सेना की मध्य कमान ने संयुक्त रूप से “बाढ़ एवं बाढ़ से संबंधित आपदाएं” विषय पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। लखनऊ छावनी के सूर्या ऑडिटोरियम में हुई इस बैठक में बाढ़ जोखिम कम करने और प्रभावी तैयारी पर गहन चर्चा हुई।
बहुराज्यीय भागीदारी
संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। आपदा प्रबंधन संस्थानों, पूर्व चेतावनी एजेंसियों, रेस्पॉन्स फोर्सेज और वरिष्ठ नागरिक-सैन्य अधिकारियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
प्रमुख चर्चा के केंद्र रहे यह मुद्दे
- जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही चुनौतियां: अत्यधिक वर्षा, फ्लैश फ्लड, शहरी बाढ़, बादल फटना, भूस्खलन और आकाशीय बिजली।
- बाढ़ पूर्वानुमान, उपग्रह निगरानी, प्रभाव आधारित चेतावनी और कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) जैसी नवीनतम तकनीकों पर
- विस्तार से चर्चा।
- IMD, CWC, NRSC, IITM, NDRF, SDRF, भारतीय सेना, वायु सेना और अन्य एजेंसियों द्वारा अपने अनुभव और तैयारियों का साझा करना।
इस मौके पर मुख्य अतिथि जल शक्ति एवं बाढ़ राहत मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि आपदा प्रबंधन में तैयारी, संस्थागत समन्वय और सामुदायिक लचीलापन सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने नेतृत्व की भूमिका पर भी जोर दिया।
मौजूद रही यह प्रमुख हस्तियां:
- लेफ्टिनेंट जनरल ए. सेनगुप्ता, जीओसी-इन-सी, मध्य कमान
- लेफ्टिनेंट जनरल योगेन्द्र डिमरी (सेवानिवृत्त), उपाध्यक्ष UPSDMA
- अन्य वरिष्ठ अधिकारी और राज्य आपदा प्राधिकरणों के प्रतिनिधि
संगोष्ठी के प्रमुख विचार
- नागरिक-सैन्य समन्वय को और मजबूत करना
- पूर्व चेतावनी प्रणाली को प्रभावी बनाना
- तकनीकी नवाचार और श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान
- पांच बाढ़ प्रभावित राज्यों के बीच बेहतर सहयोग और ज्ञान साझेदारी
यह संगोष्ठी मानसून-2026 से पहले बाढ़ प्रबंधन को लेकर एकीकृत रणनीति बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई। बता दें कि कार्यक्रम ज्ञान-विनिमय, क्षमता विकास और आपसी समन्वय को बढ़ावा देने वाली साझा प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुआ।







