रंग, रचनात्मकता और पर्यावरण का अनोखा संगम
लखनऊ, 7 जून 2026: राज्य संग्रहालय, लखनऊ में आज ग्रीष्मकालीन इंटरएक्टिव गतिविधि “खुशियों की पाठशाला” की धमक गूंजी। संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चे रंगों की मस्ती और ज्ञान की दुनिया में पूरी तरह खोए नजर आए।
माननीय मंत्री की प्रेरणा से हुआ आयोजन
माननीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री जयवीर सिंह की प्रेरणा और अपर मुख्य सचिव श्री अमृत अभिजात के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम की श्रृंखला में बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों के जरिए सीखने का अनोखा मौका मिला।
मुख्य आकर्षण
- एक पेड़ मां के नाम: बच्चे पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए मां के नाम पेड़ लगाने की प्रतिज्ञा के साथ पर्यावरण प्रति जागरूक हुए।
- रंगों की मस्ती, अलंकरण में अभिव्यक्ति: बच्चों ने अपनी कल्पना को रंगों के माध्यम से कैन्वास पर उतारा। अलंकरण प्रतियोगिता में उनकी रचनात्मकता देखते ही बनती थी।
- ऑन द स्पॉट क्विज: ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तर सत्र में बच्चों ने उत्साह से भाग लिया और अपनी बौद्धिक क्षमता दिखाई।
बच्चों का जोश, अभिभावकों का साथ
बच्चों ने इन गतिविधियों में अत्यधिक उत्साह दिखाया। उनके साथ आए अभिभावकों और संग्रहालय के दर्शकों ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया, जिससे पूरा माहौल बेहद जीवंत और उत्साही रहा।
निर्देशन और समन्वयन
कार्यक्रम का निर्देशन डॉ. विनय कुमार सिंह, निदेशक, राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा किया गया, जबकि समन्वयन की जिम्मेदारी डॉ. मीनाक्षी खेमका, सहायक निदेशक ने संभाली।
“खुशियों की पाठशाला” बच्चों में रचनात्मकता, पर्यावरण संरक्षण की भावना और सांस्कृतिक जागरूकता विकसित करने की दिशा में राज्य संग्रहालय की एक सराहनीय पहल साबित हुई। ऐसे कार्यक्रम न केवल ग्रीष्मकालीन छुट्टियों को यादगार बनाते हैं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।







