आरा। चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने सनसनीखेज मोड़ लेते हुए पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कहा कि घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जांच सौंपी जाएगी।
मुख्यमंत्री का फैसला: सच्चाई सामने आएगी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी कि सरकार इस मामले के हर पहलू की स्वतंत्र जांच चाहती है। उन्होंने कहा, “सभी संदेहों का समाधान हो और सच्चाई सामने आए, यही हमारा उद्देश्य है।” यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी बहस छिड़ी हुई है।
तीन FIR, मृतक के पिता-भाई भी नामजद
शनिवार सुबह भोजपुर पुलिस ने इस मामले में तीन अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। इनमें मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। शाहपुर थाना प्रभारी की तहरीर पर दर्ज एक प्राथमिकी में हथियार लहराने, पुलिस कार्य में बाधा डालने, सड़क जाम करने और पुलिसकर्मियों पर पथराव करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने उठाए सवाल
मामले की credibility पर सबसे बड़ा सवाल पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने उठाया है। उन्होंने कहा, “अगर भरत तिवारी ने हथियार फेंक दिया था तो फिर गोली क्यों चलाई गई?” उन्होंने घटना को संदिग्ध बताते हुए पूरी तरह निष्पक्ष जांच की मांग की।पांडेय ने वायरल वीडियो और पुलिस के आधिकारिक दावों के बीच अंतर पर भी सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस vs परिवार: दो अलग कहानियां
- पुलिस का दावा: भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर पिस्तौल तानकर फायरिंग की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में दोनों पैरों में गोली मारी गई।
- परिवार का आरोप: भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था और हथियार फेंक दिया था, फिर भी उस पर गोली चलाई गई। परिवार इसे फर्जी एनकाउंटर बता रहा है।
गांव में उबाल, हाईवे जाम और पुलिसकर्मी सस्पेंड
18 जून को घटना के बाद गांव में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। परिजनों और ग्रामीणों ने आरा-बक्सर हाईवे को जाम कर दिया। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। मामले की गंभीरता देखते हुए भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज ने थाना प्रभारी समेत 4 से 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही मजिस्ट्रेटी जांच भी शुरू कर दी गई है।
https://x.com/RanjanSinghh_/status/2068017351115858276/video/1
अब सबकी नजरें न्यायिक जांच रिपोर्ट पर
बता दें कि मुख्यमंत्री के इस बड़े फैसले के बाद पूरे बिहार की नजरें सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि भरत तिवारी एनकाउंटर सच्ची मुठभेड़ था या फर्जी।यह मामला न सिर्फ पुलिस की कार्रवाई बल्कि बिहार में कानून व्यवस्था और विश्वसनीयता की परीक्षा भी बन गया है।






