आगरा के पूर्व ARTO ललित कुमार साहब ने तो कीर्तिमान ही रच दिया!
भ्रष्टाचार अब केवल सत्ता में बैठे अधिकारियों तक सीमित नहीं रहा। सेवानिवृत्त हो चुके अफसर भी खूब कमाई का बंदोबस्त करके रखते हैं। आगरा के पूर्व ARTO ललित कुमार के घर से हुई विजिलेंस छापेमारी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सिस्टम में मगरमच्छ कितने गहरे छिपे बैठे हैं।
26 घंटे की छापेमारी, 35 करोड़ का खजाना बरामद
- विजिलेंस टीम ने कल अलीगंज की चन्द्रलोक कॉलोनी स्थित ललित कुमार के आवास पर 26 घंटे तक छापा मारा।
- नतीजा? आँखें फटने वाला। 13 किलो सोने की ईंटें और बिस्किट
- 9 किलो चांदी की ईंटें और बार
- 1.62 करोड़ रुपये नकद (दीवारों में, अलग-अलग कमरों में छिपाकर रखा गया)
- हीरे के आभूषण
- अलीगंज में आलीशान मकान, दो बड़े प्लॉट, मोहनलालगंज और बालकगंज में प्लॉट, खेती की जमीन सहित कुल 15 जगहों की प्रॉपर्टी के दस्तावेज
कुल बरामद संपत्ति की अनुमानित कीमत 35 करोड़ रुपये के आसपास बताई जा रही है।
दो चेहरे वाला “साहब”
सामने से साफ-सुथरे, ईमानदार सरकारी अधिकारी का चेहरा और अंदर से अरबों की लूट का मालिक। ललित कुमार पर आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज हो चुका है। जांच जारी है। लेकिन सवाल यह है कि इतनी संपत्ति अकेले ARTO की सैलरी से जुट गई या फिर सालों से चली आ रही “कटाई” का नतीजा है?
यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की बीमारी को उजागर करती है। रिटायरमेंट के बाद भी ऐसे अधिकारी चैन की नींद सोते हैं, जबकि आम आदमी महंगाई और भ्रष्टाचार की मार झेलता है।
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समय आ गया है सख्ती का।
न केवल सक्रिय अधिकारियों, बल्कि रिटायर्ड अधिकारियों की भी संपत्ति की जांच होनी चाहिए। जहां अचानक इतनी दौलत उग आई हो, वहां सख्त कार्रवाई जरूरी है। भ्रष्टाचार के इस मगरमच्छ को अब सिर्फ पकड़ना नहीं, पूरी तरह समाप्त करना होगा। फिलहाल ललित कुमार मामले की जांच आगे बढ़ रही है। उम्मीद है कि इस बार सच्चाई पूरी तरह सामने आएगी और दोषी को कोई राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलेगा।
भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना तभी साकार होगा, जब ऐसे हर “धन कुबेर” साहब को कानून का डंडा सही मायने में लगे।






