मुंबई: मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने केंद्र सरकार में मंत्रियों के बीच समन्वय की कमी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी के इथेनॉल ब्लेंडिंग संबंधी बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पेट्रोलियम मंत्री को बोलना चाहिए, लेकिन वे चुप्पी साधे हुए हैं, जबकि गडकरी लगातार प्रवचन दे रहे हैं।
राज ठाकरे ने कहा, “वो हमारे ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी बताते हैं कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलना चाहिए, उसके बाद बतायेंगे कि गाड़ी कैसे चलेगी। अरे इस पर पेट्रोलियम मंत्री को बोलना चाहिए ना, जबकि पेट्रोलियम मंत्री चूँ भी नहीं कर रहे इस मामले पर। लेकिन ट्रांसपोर्ट मंत्री इस पर प्रवचन दे रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि इथेनॉल मिश्रण के दाम क्या चल रहे हैं, इसके बारे में देश में किसी को कुछ भी अता-पता नहीं है। राज ठाकरे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार E20 (20% इथेनॉल ब्लेंडिंग) को बढ़ावा दे रही है और इसे पर्यावरण अनुकूल तथा आयात कम करने वाला कदम बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग से पेट्रोल की खपत कम होती है और किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है। लेकिन कई वाहन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि पुरानी गाड़ियों में ईंधन में ज्यादा इथेनॉल मिलने से इंजन को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही इथेनॉल उत्पादन के लिए भारी मात्रा में पानी की खपत भी एक बड़ी चिंता है।
राज ठाकरे ने मंत्रियों के बीच इस “असमंजस” पर सवाल उठाते हुए इशारा किया कि सरकार के अंदर ही नीतियों को लेकर स्पष्टता नहीं है। उन्होंने पूछा कि जब पेट्रोलियम मंत्रालय इस विषय का सीधा हस्ताक्षर रखता है तो ट्रांसपोर्ट मंत्री क्यों इस पर बार-बार बयानबाजी कर रहे हैं।
यह बयान महाराष्ट्र की राजनीति में भी महत्व रखता है क्योंकि राज ठाकरे लंबे समय से केंद्र सरकार की कई नीतियों पर हमला बोलते रहे हैं। उन्होंने पहले भी महाराष्ट्र के हितों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र को घेरा है।
विपक्षी दलों ने राज ठाकरे के इस बयान का स्वागत किया है। कुछ नेता इसे “सरकार की नीतिगत लापरवाही” का सबूत बता रहे हैं। वहीं, भाजपा समर्थक इस बयान को महज “राजनीतिक हमला” करार दे रहे हैं।
बता दें कि फिलहाल केंद्र सरकार E20 ब्लेंडिंग को 2025-26 तक और बढ़ाने का लक्ष्य रखे हुए है। आम जनता को अब यह देखना होगा कि इथेनॉल मिश्रण से पेट्रोल की कीमतों में कितनी राहत मिलती है और वाहनों पर इसका क्या असर पड़ता है।






