“अनशन से शारीरिक-मानसिक क्षति हुई तो जिम्मेदारी कौन लेगा?”
नई दिल्ली: लद्दाख के पर्यावरणविद् और शिक्षक सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अनशन के 18वें दिन पहुंच गए हैं। मांगों पर सरकार की चुप्पी के बीच उनकी भूख हड़ताल को अब देशव्यापी समर्थन मिल रहा है।
शंकराचार्य का तीखा रुख
श्री शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री कार्यालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा, “भारत की सरकार @PMOIndia इसमें तत्काल हस्तक्षेप करे और निर्णय करे। अनशन से यदि शारीरिक और मानसिक क्षति होगी तो कौन उसकी पूर्ति करेगा? हमने स्वयं उपवास किए हैं, इसलिए हम जानते हैं कि सोनम वांगचुक किस स्थिति में होंगे।”
सरकार पर सवाल
वांगचुक के समर्थकों का कहना है कि 18 दिन से देश उनकी आवाज सुन रहा है, लेकिन सत्ता पूरी तरह खामोश है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने लिखा, “अगर सरकार छात्रों और जनता की आवाज का जवाब नहीं दे सकती, तो संबंधित मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। नैतिक रूप से उनके पास पद पर बने रहने का अधिकार नहीं बचता।”
सोनम वांगचुक लद्दाख की पर्यावरणीय सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। उनकी भूख हड़ताल अब स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा रही है।
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अभी तक कोई सरकारी प्रतिक्रिया
बता दें कि प्रधानमंत्री कार्यालय या संबंधित मंत्रालय की तरफ से अब तक फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।







