तेहरान दहला, UAE ने दी कड़ी चेतावनी
नई दिल्ली/वाशिंगटन (15 जुलाई 2026): पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार तीसरे दिन हमले तेज कर दिए हैं। सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि राष्ट्रपति के निर्देश पर शाम 4:45 बजे (ईटी) शुरू हुए इन हमलों का मकसद ईरानी सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाना और होर्मुज जलडमरूमध्य में नागरिक जहाजों पर हमले की ईरान की ताकत को कमजोर करना है।
होर्मुज में फिर नाकेबंदी
इससे पहले 14 जुलाई को अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू करने का ऐलान किया था। अमेरिकी बल अब उन सभी जहाजों पर नाकेबंदी लागू कर रहे हैं जो ईरानी तटीय क्षेत्रों से आ-जा रहे हैं। हालांकि, नियमों का पालन करने वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
अमेरिका ने इससे पहले 13 अप्रिल से 18 जून तक भी नाकेबंदी लगाई थी। उस दौरान 140 से ज्यादा जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया गया, 9 जहाजों को निष्क्रिय किया गया और 50 से अधिक मानवीय सहायता वाले जहाजों को पास किया गया। नाविकों को नोटिस टू मरीनर्स पर नजर रखने और ब्रिज-टू-ब्रिज चैनल-16 पर संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई है।
UAE का तल्ख रुख
ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो टैंकरों पर हमला किया, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हुए। मोम्बासा और अल बहियाह नामक टैंकरों पर क्रूज मिसाइलें दागी गईं, जिससे आग लग गई। UAE के रक्षा मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वह अपने क्षेत्र, नागरिकों और हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। हमले के बाद दुबई के ऊपर लड़ाकू विमानों की आवाजें सुनाई दीं।
हूतियों का सऊदी अरब पर हमला
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अबहा एयरपोर्ट पर मिसाइल हमला कर दिया। हूतियों का दावा है कि यह सना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सऊदी हमले का जवाब था, जिसे अमेरिका का समर्थन प्राप्त था। इससे सऊदी अरब भी जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
अन्य देशों पर हमले
ईरान ने जॉर्डन पर भी चार मिसाइलें दागीं, जिन्हें जॉर्डन की सेना ने इंटरसेप्ट कर लिया। बहरीन में अमेरिकी पांचवीं फ्लीट और इराक में भी ईरानी हमलों की खबरें आई हैं।
पूरे खाड़ी क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंका
विश्लेषकों का मानना है कि तनाव अब पूरे क्षेत्र में फैलने वाला है। अमेरिकी हमलों, होर्मुज नाकेबंदी और ईरान के जवाबी हमलों से तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
फिलहाल अभी तक दोनों तरफ से कोई डी-एस्केलेशन का संकेत नहीं मिला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय नजरें टिकाए हुए है कि कहीं छोटा सा स्पार्क पूरे मध्य पूर्व को आग में न झोंक दे।







