प्रकृति संरक्षण का संदेश, पारंपरिक गीत-नृत्य और 150 पौधों का वितरण – प्रवासी समाज ने जीवंत किया संस्कृति
लखनऊ: कल्याणपुर में प्रवासी उत्तराखण्ड समाज एवं आर्ट्स एंड कल्चरल सोसाइटी के संयुक्त आयोजन में उत्तराखण्ड का प्राचीन लोकपर्व हरेला पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक विधि-विधान के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य आनंद जोशी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हरेला की प्रतिष्ठा एवं पूजा-अर्चना से हुआ। बुजुर्ग महिलाओं ने बच्चों और बड़ों के सिर पर हरेला रखकर मंगल आशीर्वाद दिया। सभी ने मिलकर पारंपरिक हरेला गीत “जी रया, जागि रया” गाया और झोड़ा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसने पूरे माहौल को उत्तराखण्डी संस्कृति से सराबोर कर दिया।
भरत सिंह बिष्ट ने कहा, “हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का प्रतीक है।” इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का खास संदेश देते हुए सभी उपस्थित लोगों को 150 पौधे भेंट किए गए और वृक्षारोपण व प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया गया। उपस्थित सभी ने एक-दूसरे को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दीं और सुख, समृद्धि, खुशहाली एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
कार्यक्रम में गिरधर सिंह मनराल, पूरन सिंह जीना, पूरन जोशी, लाल सिंह बिष्ट, शोभा पटवाल, रेखा गोस्वामी, शशि जोशी सहित बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डवासी मौजूद रहे। यह आयोजन न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने, बल्कि नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने का सुंदर उदाहरण साबित हुआ।







