जंतर-मंतर पर युवाओं का संघर्ष: सिक्योरिटी गार्ड से लेकर पुलिस अधिकारी तक की अनोखी कहानियां
गुरुग्राम का UPSC अभ्यर्थी बना प्रोटेस्ट का चेहरा
नोयडा : प्रशांत यादव, मास्टर्स कर रहे एक साधारण युवा, जो UPSC की तैयारी के साथ-साथ अपना खर्च चलाने के लिए गुरुग्राम में 16 हजार रुपये मासिक वेतन पर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर युवाओं पर हुई लाठीचार्ज की खबर सुनते ही वह खुद को रोक नहीं पाए। समर्थन देने पहुंच गए।
नतीजा? कंपनी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया।
लेकिन प्रशांत हारे नहीं। अब दो-तीन दिन से वर्दी में ही जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। जब एक पत्रकार ने उनसे नौकरी जाने पर पूछा, तो उनका जवाब दिल छू गया:
“नौकरी गई तो गई, लेकिन जब शीशे में मुंह देखूंगा तो खुद पर गर्व महसूस होगा। कम से कम शर्म तो नहीं आएगी न!”
सलाम है प्रशांत भाई को! ऐसे सिद्धांतों वाले युवा ही देश की असली ताकत हैं।“देश ऐसे लोगों से ही चल रहा है, बाकी सब चोर हैं”
सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रशांत की तारीफों के पुल बांध दिए।
प्रेम: “ऐसे लोगों से ही हमारा देश चल रहा है, बाकी सब तो चोर हैं।”
निधि यादव: “अपने सिद्धांतों के लिए खड़ा होना साहस की बात है। उम्मीद है कि प्रशांत यादव को बेहतर अवसर मिलें और सभी पक्ष कानून व शांतिपूर्ण संवाद के रास्ते आगे बढ़ें।”
मनोज: “इस प्रोटेस्ट से रोज सैकड़ों ऐसी कहानियां निकल आ रही हैं।”
दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर ने भी छोड़ी नौकरी
जंतर-मंतर पर सिर्फ प्रशांत ही नहीं, हरियाणा के मोहित जाट ने भी बड़ा फैसला लिया। दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़कर वे छात्रों के आंदोलन में शामिल हो गए। जब उन्हें पता चला कि छात्र संसद तक मार्च करेंगे, तो उन्होंने मेडिकल लीव ली। छुट्टी खत्म होने पर ड्यूटी जॉइन करने के लिए बार-बार बुलाया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। आखिरकार लगातार दबाव के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और जंतर-मंतर पहुंच गए।
अरिजीत सिंह का खुला समर्थन
इस आंदोलन को बॉलीवुड से भी समर्थन मिल रहा है। गायक अरिजीत सिंह ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों को पीटा जा रहा है, शर्म आनी चाहिए। उन्होंने नेताओं को चेतावनी देते हुए लिखा- “हर चीज याद रखा जाएगा!” (उन्होंने छात्रों के समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाया।)
जुनून और बलिदान की मिसाल
जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन अब सिर्फ NEET पेपर लीक या शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा नहीं रहा। यह सिद्धांतों, साहस और युवा जुनून की कहानी बन गया है। प्रशांत यादव, मोहित जाट जैसे युवा बता रहे हैं कि नौकरी, सैलरी या आराम से बड़ा कुछ है – अपनी अंतरात्मा की आवाज।
ईश्वर से दुआ है कि इन सभी संघर्षशील युवाओं को जल्द सफलता मिले और उनकी आवाज सुनी जाए। जय हिंद! इन हिम्मती युवाओं को सलाम!






