आहार अपनाने के बाद गंभीर कुपोषण से जूझते हुए अपनी जान गंवा दी
बाली, 29 अक्टूबर 2025 : स्वास्थ्य और पोषण विज्ञान के क्षेत्र में एक चौंकाने वाली घटना ने दुनिया भर के विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है। मात्र 27 वर्ष की एक युवती, करोलिना क्रेज़्याक, ने चरम “फ्रूटेरियन” (केवल कच्चे फलों पर आधारित) आहार अपनाने के बाद गंभीर कुपोषण से जूझते हुए अपनी जान गंवा दी। यह घटना बाली के एक रिसॉर्ट में हुई, जहां उनका वजन घटकर महज 22 किलोग्राम रह गया था। चिकित्सा रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी मौत का मुख्य कारण प्रोटीन, वसा, कैल्शियम और विटामिन बी12 की गंभीर कमी थी, जिसने उनके हड्डियों को कमजोर (ऑस्टियोपोरोसिस) कर दिया और एल्ब्यूमिन की कमी से अंग विफलता हो गई।
करोलिना, जो मूल रूप से ब्रिटेन में पढ़ाई कर चुकी थीं, योग और वेगनिज्म की शौकीन थीं। बचपन से ही बॉडी इमेज और एनोरेक्सिया से जूझ चुकीं उन्होंने धीरे-धीरे अपना आहार केवल फलों तक सीमित कर लिया। दिसंबर 2024 में बाली के सुम्बर्किमा हिल रिसॉर्ट में चेक-इन करने के बाद, उन्होंने पूल वाली विला मांगी और स्टाफ को केवल फल परोसने का निर्देश दिया। लेकिन कुछ ही हफ्तों में उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि वे खुद चल भी नहीं पा रही थीं। होटल कर्मचारियों ने उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने की कोशिश की, लेकिन देर हो चुकी थी।

पोषण विज्ञान के अनुसार, फल-केवल आहार क्यों घातक?
विशेषज्ञों का कहना है कि फल विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो पाचन और डिटॉक्स के लिए फायदेमंद हैं। लेकिन लंबे समय तक केवल इन्हें अपनाने से शरीर में प्रोटीन, स्वस्थ वसा, आयरन, कैल्शियम और विटामिन डी-बी12 की कमी हो जाती है। मनिपाल हॉस्पिटल, यशवंतपुर के मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. मुरुगेश मंजुनाथा बताते हैं, “फल-आधारित आहार गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम को असंतुलित कर देता है। ऊर्जा के लिए पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट्स न मिलने से मांसपेशियां कमजोर पड़ती हैं, इम्यून सिस्टम प्रभावित होता है और हड्डियां भंगुर हो जाती हैं। यह एनीमिया, हृदय रोग और यहां तक कि मल्टी-ऑर्गन फेलियर का कारण बन सकता है।”
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न्यूयॉर्क पोस्ट और द सन की रिपोर्ट्स के मुताबिक, करोलिना के दांत सड़ चुके थे और नाखून पीले पड़ गए थे—ये कुपोषण के स्पष्ट लक्षण थे। पोषण विशेषज्ञ रितिका समद्दार (मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल) कहती हैं, “कच्चे फल आहार से वसा-घुलनशील विटामिन्स का अवशोषण रुक जाता है। प्रोटीन की कमी से घाव भरना, नर्व सिग्नलिंग और पाचन प्रभावित होता है। संतुलित आहार ही सच्चा स्वास्थ्य है; सप्लीमेंट्स के बिना चरम डाइट घातक साबित हो सकती है।”
वैज्ञानिक चेतावनी: संतुलन ही कुंजी
यह पहली घटना नहीं है। 2023 में रूसी इन्फ्लुएंसर झन्ना सैमसोनोवा (39 वर्ष) भी जैकफ्रूट और डुरियन जैसे फलों पर निर्भर रहने से “कोलेरा जैसी संक्रमण” से मर गईं, जो वास्तव में कुपोषण से उपजा था। हेल्थलाइन के अनुसार, रॉ वेगन डाइट डायबिटीज का जोखिम कम कर सकती है, लेकिन असंतुलित रूप में हड्डी कमजोरी, थकान और इम्यून डेफिशिएंसी लाती है।
डॉक्टर सलाह देते हैं: फल आहार अपनाने से पहले न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लें। प्रोटीन के लिए नट्स-सीड्स, वसा के लिए एवोकाडो और विटामिन्स के लिए सप्लीमेंट्स जरूरी हैं। करोलिना की दुखद मौत हमें याद दिलाती है—स्वास्थ्य विज्ञान कहता है, “संतुलन टूटा तो जीवन रुक जाता है।”






