निशाने पर भाजपा की मोदी-योगी सरकार ही रही
लखनऊ 5 अक्टूबर। अखिलेश यादव को पांच साल के लिए समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी के संविधान में भी संशोधन किया गया। इससे पहले पार्टी के अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता था। इससे पहले मुलायम सिंह यादव पार्टी के अध्यक्ष थे। समाजवादी पार्टी में विवाद बढ़ने के बीच इसी साल जनवरी में लखनऊ में आपातकालीन अधिवेशन बुलाकर अखिलेश यादव को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया था, जबकि मुलायम सिंह यादव की गैरमौजूदगी में उनको समाजवादी पार्टी का संरक्षक बनाया गया था।

जानकारी के अनेक राज्यों से जुटे लगभग पंद्रह हजार प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी सपा गुरुवार को अखिलेश के पीछे नजर आई। अखिलेश के निशाने पर भाजपा की मोदी-योगी सरकार ही रही। उन्होंने कहा कि हमने प्रदेश में विकास की योजनाएं शुरू की। डायल-100, 108, 102 जैसी योजनायों को खत्म कर दिया। लोग परेशान हैं। हम रैली करेंगे, शिविर लगाएंगे और लोगों से बात करेंगे। उनका समंर्थन मांगेंगे। अखिलेश ने कहा कि दिल्ली की सरकार ईडी और सीबीआइ से लोगों को डराती है लेकिन, हम पहले से ही सीबीआइ क्लब में हैं। हम चुनौतियों का सामना करेंगे। इससे पहले आजम खां ने लालू प्रसाद यादव का उदाहरण देते हुए अखिलेश से कहा कि जरूरत पडऩे पर उन्हें भी सीबीआइ के सामने तनकर खड़े होना होगा। सपा अध्यक्ष ने एक बार फिर नोटबंदी, जीएसटी और किसानों की कर्ज माफी को लेकर भाजपा को घेरा।

स्वागत भाषण करते हुये पूर्व सांसद रामजी लाल सुमन ने कार्यकर्ताओं से चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा। सम्मेलन को उपाध्यक्ष किरनमय नंदा, महासचिव नरेश अग्रवाल, सांसद जया बच्चन, डिंपल यादव, अरविंद सिंह गोप, अभिषेक मिश्र, राम गोविंद चौधरी, इंद्रजीत सरोज जावेद आब्दी ने भी संबोधित किया। प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने संचालन किया।
photo: Azam Husain







