तीन युगल जोड़ियों ने रच दिया जादू
लखनऊ। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में बिरजू महाराज कथक संस्थान की ‘कथक संध्या’ श्रृंखला में गुरुवार शाम ‘युगल नृत्यांजलि’ कार्यक्रम ने दर्शकों को कथक की जादुई दुनिया में खींच लिया। मंच पर तीन प्रतिभाशाली जोड़ियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं के दिल जीत लिए।
रतन सिस्टर्स का भावपूर्ण जलवा
गुरु अर्जुन मिश्र व सुरभि सिंह की शिष्याएं ईशा और मीशा रतन (रतन सिस्टर्स) ने कार्यक्रम की शुरुआत रुद्राष्टकम से की। तीन ताल पर पारंपरिक कथक का शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने राग मेघ में ‘बादल रे अरज गरज…’ बंदिश के जरिए भाव और अभिनय का ऐसा जादू रचा कि पूरा सभागार भावविभोर हो गया। तबला पर राजीव शुक्ला, सारंगी पर मनीष और हारमोनियम पर आरिफ ने उम्दा संगत दी।
शिव आराधना से शुरू, बादलों का गर्जन तक
अंजुल बाजपेई एवं पीयूष पाण्डेय की जोड़ी ने “डमरू हरकर बाजे” रचना से भगवान शिव की आराधना की। परंपरागत तीनताल पर आधारित शुद्ध नृत्य के बाद उन्होंने “बादल गरज नवघोर” रचना से लयकारी और भावाभिव्यक्ति का कमाल दिखाया।
गोविंद-रोशनी का मंत्रमुग्ध करने वाला सफर
कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति गोविंद चौधरी एवं रोशनी प्रसाद ने दी। “नमामी शमीशाम” स्तुति से शिव आराधना के बाद 15 मात्रा की जटिल पंचम सवारी ताल में अपनी तकनीकी दक्षता दिखाई। समापन “श्री राधे रानी” पर राधा-कृष्ण की मधुर छेड़छाड़ के सजीव चित्रण ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोनों जोड़ियों के बीच अद्भुत सामंजस्य और तालमेल देखने लायक रहा।
दीप प्रज्ज्वलन और उपस्थिति
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आचार्य संजय सिंह (कुलपति, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय) और संस्थान अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी और सदस्य सुरभि सिंह भी उपस्थित रहीं। मंच संचालन देवेंद्र सिंह ने बखूबी किया।
बता दें कि समूचे कार्यक्रम में कलाकारों की साधना, तालबद्धता और भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों का मन मोह लिया। कथक प्रेमियों के लिए यह संध्या यादगार बन गई।







