बच्चे प्रतिदिन करेंगे योग, रहेंगे निरोग

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कर्मसु कौशलम् अर्थात् अपने कार्यों में कुशलता ही योग है

लखनऊ,17 जून 2019: गीता परिवार के तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीय अर्जुन भव संस्कार पथ शिविरांे का सोमवार को समापन किया गया जिनमें महाराणा प्रताप पार्क सीतापुर रोड में गीता श्लोक में अंश साहू, ध्यान में चंदन धर्मा, आदर्श शिविरार्थी में दीपांश वर्मा, रचनात्मक कार्य में मनु गुप्ता, ध्रुव साधना में शैली पाण्डेय, श्रीदुर्गाजी मंदिर द्वारिकापुरी भिठौली में प्रश्नोत्तरी में तनु पाण्डेय, ध्रुव साधना में आयुष पाण्डेय, ज्ञानवर्धक गृहकार्य में श्रेया पाण्डेय, राजाबाजार पार्क में रंगायन स्पर्धा में आयुष कश्यप, भगवद्गीता श्लोक स्पर्धा में अंशवी, सर्वश्रेष्ठ शिविरार्थी में खुशी कश्यप, काकोरी केन्द्र में सर्वश्रेष्ठ शिविरार्थी में मोहनी रावत, धु्रव साधना में मुस्कान, चित्र प्रतियोगिता में अनुष्का राजपूत, काली माता मंदिर लोखड़िया में आदर्श शिविरार्थी में किशन वर्मा, गीत में निशा वर्मा, गीता श्लोक में नीतिश वर्मा, अर्जुन साधना में अंकित प्रजापति ने बाजी मारी।

इस अवसर पर मुख्य अतिथियों में डा. आशु गोयल गीता परिवार के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, गोदावरी देवी, शिवेन्द्र मिश्रा, गोलादास, मनीष रावत, अमित वर्मा मौजूद थे। मुख्य अतिथियों ने प्रतियोगिता के विजयी बच्चों को पुरस्कृत किया। इस मौके पर शिविर में सिखायी बातों को बच्चों ने शिविर वृतांत की मनमोहक छठा मुख्य अतिथियों के समक्ष बिखेरी। शिविर का निर्देशन सुभाषिनी गुप्ता, उदय साहू, प्रियांशु वर्मा, देशराज राजपूत, सोनालिका दीक्षित व सत्रों का संचालन ज्योति गुप्ता, अंजलि गुप्ता, पीयूष गुप्ता, सुमित गुप्ता, खुशी साहू, सौम्या श्रीवास्तव, मनन माहेश्वरी, कविता वर्मा, माही वर्मा, नैंसी पाण्डेय, अंजलि रावत, रिया मिश्रा, दीपिका मिश्रा, अनुष्का मौर्य ने किया। डा. आशु गोयल ने बताया श्रीमद्भगवदगीता में वर्णित 26 दैवीय गुणों के बारे में बच्चों को विस्तारपूर्ण बताया और उसको अपने जीवन में धारण का करने का संकल्प दिलवाया।

योग प्रशिक्षक अरविंद शर्मा ने बताया कि योगः कर्मसु कौशलम् अर्थात् अपने कार्यों में कुशलता ही योग है। योग प्रशिक्षक के निर्देशन में खड़ी स्थिति के आसनों में अर्द्ध कटिचक्रासन, वृक्षासन, उत्थि त्रिकोणासन, पादहस्तासन, बैठक स्थिति के आसनों में वज्रासन, शशांकासन, पद्मासन, मार्जरासन, पीठ के बल लेटी स्थिति में आसनों में सुप्त कपोतासन, उत्तान पादासन, विपरीतकरणी मुद्रा, सुप्त पवन मुक्तासन, पेट के बल लेटी स्थिति के आसनों में मकरासन, भुजंगासन, एकपाद शलभासन, विपरीत मेरुदंडासन के आसनों का बच्चों को प्रशिक्षण दिया। योग करने का सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल ही है।

बच्चों को योग अवश्य करना चाहिए जिससे उनमें एकग्रता शक्ति में वृद्धि हो सके। योग करने से शारीरिक, मानसिक विकास और ध्यान करने से मन शांत रहता है। तभी संभव होगा बच्चे करेंगे योग, ध्यान रहेंगे निरोग। अनुराग पाण्डेय ने बताया कि अर्जुन भव संस्कार पथ शिविरों में गीत, भगवद्गीता, मधुराष्टक स्त्रोत, नियुद्ध कला, प्रश्नोत्तरी, कहानियां, प्रात्यक्षिक, रचनात्मक कार्य सिखाया जा रहा है। हजारों बच्चों नित प्रतिदिन शिविरों प्रतिभाग कर रहे है।

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