नवेद शिकोह
सदी के इतिहास में मनहूसियत के लिए जाने-जाने वाला 2020 जाते-जाते एक बार फिर कला जगत और सांस्कृतिक पत्रकारिता को झटका दे गया। कलाविद और समीक्षक कृष्ण मोहन मिश्रा का कल रात हार्टअटैक से लखनऊ में निधन हो गया। वो सत्तर वर्ष के थे।
नव वर्ष की पहली सुबह ये खबर सुन कर कला-सांस्कृतिक जगत को बड़ा आघात पंहुचा। करीब सन1980 से 1995 के दरम्यान अमृत प्रभात, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान से वो बतौर कला समीक्षक जुड़े थे। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की सांस्कृतिक शाखा संस्कार भारतीय की पत्रिका कला कुंज के वो संपादक रहे। पत्रकारिता के लम्बे समय काल में उन्होंने उत्तर प्रदेश समाचार सेवा में भी बतौर संपादक सेवाएं दीं।उपजा में भी वो पदाधिकारी रहे।
वाराणसी से ताल्लुक रखने वाले कृष्ण मोहन मिश्रा शास्त्रीय और लोक संगीत की गहरी समझ रखने के साथ कला जगत के बेमिसाल छायाकार भी थी। रंगकर्म से भी उनका गहरा रिश्ता था। कैमरे की फ्लेशलाइट के बिना मंच के वास्तविक प्रकाश में आकर्षक कम्पोजीशन को बेहतरीन फ्रेम मे क़ैद करना उनकी फोटोग्राफी का कमाल था।
अखबारों में सांस्कृतिक पत्रकारिता के दुर्लभ हो चुके दौर में कला समीक्षक /छायाकार कृष्ण मोहन मिश्रा का चला जाना कला और सांस्कृतिक जगत व सांस्कृतिक रिपोर्टिंग के लिए बड़ा झटका है।
श्रद्धांजलि







