जी के चक्रवर्ती
सोशल मीडिया में 5 अगस्त 2022 को एक वीडियो के वायरल होने से सरकारी तंत्र में सनसनी मच गयी, मामला ही कुछ ऐसा था जिससे सरकार की बहुत ही किरकिरी हो रही थी, मामला ग्रेटर नोएडा के एक अपार्टमेंट का था जहाँ एक गुंडा महिला के साथ गुंडागर्दी कर रहा था। जहाँ इस के अपार्टमेंट के संभ्रांत लोग उसे सालों से उसकी गुंडागर्दी बर्दाश्त करते चले आ रहे थे क्योंकि उस गुंडे को सरकारी नेताओं का संरक्षण प्राप्त था। जब यह वीडियो सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफार्म पर वायरल हुआ तो सरकारी तंत्र सकते में आ गया क्योंकि वीडियो की जानकारी सीधे यूपी के सीएम के संज्ञान में आ गयी थी, जिनके सख्त निर्देश के बाद सरकार के उच्चपदस्त लोग तत्काल हरकत में कड़ी कार्रवाई के एक्शन में आ गए।
इस वायरल विडियो में श्रीकांत त्यागी एक महिला के साथ बद-ज़ुबानी करते पाया गया। महिला उन पर फ़्लैट के सामने की भूखंड पर अतिक्रमित कर पाम के पेड़ लगाने का आरोप लगा रही हैं। श्रीकांत त्यागी उन्हें रोकते हुए बदसलूकी कर गाली गलौज पर उतर आया और फिर वह महिला को धक्का देते हुए भी दिखाई दिया। इस वीडियो के बाद श्रीकांत त्यागी की गुंडागर्दी की कलई खुल गयी और उसके कथित काले कारनामे धीरे धीरे बे- नकाब होते चले गए जिसके बाद बाबा का बुलडोजर उसके अवैध निर्माण पर चल गया और उस पर पच्चीस हज़ार का इनाम घोषित हो गया। आज वह पुलिस की हिरासत में है और उस पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीकांत त्यागी कथित तौर पर बीजेपी पार्टी के किसान मोर्चा में राष्ट्रीय समन्वयक और किसान मोर्चा में के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य था। हालांकि बीजेपी ने इस बात को नकार दिया है और उनके भाजपा से संबद्धता के दावों का भी खंडन कर दिया है। गौतमबुद्धनगर से सांसद महेश शर्मा के अनुसार, त्यागी स्थानीय स्तर पर पार्टी से जुड़े नही थे।
दरअसल श्रीकांत त्यागी, नोएडा के भंगेल का रहने वाला एक व्यक्ति है लेकिन इन दिनों उसके द्वारा नोएडा के ग्रांड ओमेक्स सोसाइटी के एक महिला से अभद्रता करना उसके लिए भारी पड़ गया।
श्रीकांत त्यागी के पूर्व काल में झांकें तो यह बात सामने निकल कर आती है कि भंगेल का रहने वाला श्रीकांत त्यागी इतना रसूखवाला व्यक्ति कैसे बना? जो अपने साथ एस्कोर्ट और बाउंसरों की टीम लेकर चलता था।
दरअसल आपको बता दें कि वर्ष 2016 को भंगेल में नोएडा अथॉरिटी ने लगभग 2 हजार करोड़ रुपये वाली बेशकीमती जमीनों का अधिग्रहण किया गया था। उन जमीनों मे श्रीकांत त्यागी के परिवारजनों की करोड़ों रुपये की कीमत की जमीने भी हुआ करती थी। श्रीकांत त्यागी और उनके परिवार को करोड़ों रुपये का मुआवजा नोएडा अथॉरिटी की ओर से इन जमीनों के मुआवजा के तौर पर दिया गया था। इन रुपयों के बल पर श्रीकांत त्यागी ने अपने लिए बड़ी-बड़ी गाड़ियां खरीद कर पूरे लावलश्कर के साथ चलने लगा और धीरे- धीरे अपना हनक व रसूख बढ़ाता चला गया।
उसके आगे पीछे एस्कॉर्ट तो चलती ही थी साथ ही बाउंसरों की एक लंबी फौज भी चलती थी जिससे वह अपना प्रभुत्व बनाता चला गया। इस दौरान उसे राजनीति और राजनीतिज्ञों के निकट उठने – बैठने का चस्का लगने लगा और वह बीजेपी के नजदीक आने के लिए पार्टी के छोटे-मोटे कार्यक्रमों में आना- जाना शुरू कर दिया। उसने बीजेपी के नेताओं से संपर्क में रहना प्रारंभ कर दिया इस तरह वह अपना रसूख बढ़ाता चला गया।
आप लोगों को शायद याद होगा कि अभी वर्ष 2020 में कानपुर में गैंगस्टर विकास दुबे नाम के बदमाश को पुलिस वालो ने मार गिराया था। ठीक उसी सदृश श्रीकांत त्यागी की क्रिया कलापें भी बनती चली गई। विकास दुबे मामले में भी यह बात सामने यह निकल कर आई कि उसकी पहुंच उच्च पदासीन लोगों के साथ हुआ करती थी। जिसमे पुलिस अधिकारियों से लेकर राज नेताओं से उसकी संलिप्तता अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही।
दरअसल जबसे राजनीति का अपराधीकरण हुआ उस वक्त से समाज में अपराध जगत से जुड़े बाहुबलियों के साम्राज्य में और अधिक बढ़ोत्तरी होती चली गई, शायद इसकेलिए अधिक जिम्मेदार अत्याधिक धन के साथ साथ धन के गलत हाथों में पहुंचना और भी खतरनाक हो जाता है।
आज से लगभग एक दशक पहले जब उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार सत्तासीन थी तो कई बड़े नेताओं के साथ श्रीकांत त्यागी का उठना बैठना हुआ करता था। उस दौरान सोनभद्र से लेकर अन्य जनपदों के खनन आरोपी के मामलों से उसका नाम जुड़ा हुआ था।
इसमें मोटी कमाई करने के बाद नोएडा-ग्रेनो के बिल्डरों पर भी वह राजनीतिक रसूख में दबाव बनाने लगा था और विपक्षी पार्टी के नेताओ के साथ भी उसकी फोटो सोशल मीडिया में भी शेयर होते रहे हैं। जबकि भारतीय जनता पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि उनका श्रीकांत त्यागी से कोई लेना देना नहीं है और न ही वह भाजपा का सक्रिए कार्यकर्ता है एसे में एक बार फिर यह प्रश्न उठता है कि क्या अत्याधिक धन ही समस्त अराजकता का जड़ है? दरअसल धन यदि गलत हाथों में पड़ा तो उसका गलत उपयोग होना भी निश्चित है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के नोएडा अथॉरिटी में भी श्रीकांत त्यागी का मजबूत पकड़ होने के कारण श्रीकांत त्यागी ने कॉमन एरिया में दीवार खड़ी कर दी और बेसमेंट में अवैध निर्माण भी किया हुआ था। वर्ष 2019 में बाकायदा इसकी लिखित शिकायत नोएडा अथॉरिटी में की गई थी लेकिन उसका वहां सिक्का चलने कारण उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिछले तीन वर्षो से अथॉरिटी के अधिकारी फाइल को दबाए हुए बैठे थे।
उत्तर प्रदेश के औधोगिक क्षेत्र नोएडा के ग्रांड ओमेक्स सिटी में रहने वाली एक महिला से अभद्रता कर गाली गलौज करना श्रीकांत त्यागी के गले की हड्डी बन गई है। इस मामले में श्रीकांत त्यागी के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त से सख्त कार्यवाही कर उत्तर प्रदेश की जनता को यह संदेश दिया कि सरकार हमेशा आपराधिक छवि वाले लोगों एवम नेताओं के विरुद्ध विशेष कर महिलाओं से अभद्रता एवम उनके मान सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले लोगों या अपराधियों के प्रति बहुत कठोर है। खैर जो भी हो यह तो स्पष्ट है कि मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुंडों बदमाशों के नाक में नकेल डाल दिया है।







