हरिद्वार, 16 अगस्त 2025: हरिद्वार से एक बड़ी खबर है। पतंजलि समूह के संस्थापक और योग गुरु स्वामी रामदेव ने अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप पर कड़ा प्रहार किया है। 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हरिद्वार में पतंजलि विश्वविद्यालय और योग भवन में आयोजित ध्वजारोहण समारोह में उन्होंने कहा, “भारत, रूस, चीन, मध्य एशिया के कुछ राष्ट्र और कुछ यूरोपीय देशों का नया गठबंधन अमेरिका और ट्रंप को उनकी हैसियत दिखा देगा। इसके बाद वैश्विक मंच पर अमेरिका और ट्रंप का दबदबा खत्म हो जाएगा।”
किस संदर्भ में दिया बयान
रामदेव का यह बयान अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लागू करने के फैसले के जवाब में आया है। ट्रंप ने भारत, चीन और अन्य देशों पर भारी टैरिफ लगाने की नीति को अमेरिकी हितों की सुरक्षा से जोड़ा है। उनका कहना है कि भारत-रूस तेल व्यापार और भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ इस कदम की वजह हैं। इस बयान ने वैश्विक कूटनीति में तनाव पैदा कर दिया है।
भारत की शक्ति का वैश्विक गठजोड़ पर बल
रामदेव ने भारत, रूस और चीन के बीच बढ़ते सहयोग का हवाला दिया। 2023-24 में भारत-रूस व्यापार 65 अरब डॉलर और भारत-चीन व्यापार 130 अरब डॉलर से अधिक रहा। BRICS और SCO जैसे मंचों के जरिए ये देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं, जो अमेरिकी डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है। 2024 में वैश्विक व्यापार में डॉलर का हिस्सा 58% था, जो 2000 में 71% से कम है।
वैश्विक प्रतिक्रियाएं
भारत में चीन के राजदूत ने बिना नाम लिए अमेरिकी “धमकाने” की नीति की आलोचना की, जबकि रूस के राजदूत ने इसे “पश्चिमी पाखंड” करार दिया। भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने और वैश्विक मंचों पर प्रभाव बढ़ाने की बात दोहराई है।
विवादित बयान ने दिया सामाजिक बहस को जन्म
रामदेव के इस बयान ने भारत में राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। कुछ लोग इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का प्रतीक मान रहे हैं, तो कुछ इसे अमेरिका के साथ संबंधों के लिए जोखिम भरा बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी कूटनीति में संतुलन बनाए रखेगा, लेकिन वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव की संभावना बढ़ रही है।







