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    Home»बच्चों की दुनिया

    संस्कार ही हमें ऊंचाई तक ले जाते हैं

    By May 18, 2018 बच्चों की दुनिया No Comments4 Mins Read
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    जिस तरह एक अनगढ़ पत्थर को शिल्पी सुंदर मूर्ति में बदल देता है, उसी तरह परिवार से मिलने वाले संस्कार हमें खूबसूरती से तराशते हैं। अगर हम इसकी मजबूत डोर पकड़ लें,तो हमें मिल सकती है तरक्की!

    एक बार की बात है पिता जी पतंग उड़ा रहे थे। बेटा उन्हें ध्यान से देख रहा था। पतंग काफी दूर तक चली गई। वहां से वह बेटे को स्थिर नजर आने लगी। पतंग को एक ही जगह पर देख बेटे ने पिता से कहा, ‘पापा, आपने पतंग की डोर पकड़ रखी है, उसे बांध रखा है, इसलिए वह आसमान में और ज्यादा आगे नहीं जा पा रही है।’ पिता ने बेटे की बात सुनी, थोड़ा मुस्कुराए और हाथ में पकड़ी डोर को तोड़ दिया। बंधन से मुक्त होकर पतंग हवा के झोंके से थोड़ी ऊंची तो गई, लेकिन फिर हिचकोले खाती हुई तेजी से नीचे आने लगी और आखिरकार मैदान में गिर गई। पतंग के नीचे गिरने से बेटा दुखी और निराश हो गया। सोचने लगा, अब तो डोर से मुक्त हो गई थी पतंग, फिर कैसे लड़खड़ा गई?

    हमारा परिवार हमें बैलेंस करता है

    बेटे का दुख समझ पिता ने उसे पास बैठाया और प्यार से समझाते हुए कहा, ‘बेटा, हम अपने जीवन में सफलता की ऊंचाइयां छूने लगते हैं और ढेर सारा धन कमा लेते हैं तो हमें लगने लगता है कि हम पर अन्य जिम्मेदारियां नहीं होतीं तो हम और तरक्की करते। घर-परिवार, संस्कार के बंधनों में नहीं बंधे होते तो और आगे जाते। ऐसे में हर बंधन से मुक्त होना चाहते हैं। भार लगने लगते हैं हमारे संस्कार, घर-परिवार, जबकि हमारे दोस्त, हमारी संस्कृति और हमारा परिवार हमें बैलेंस करता है। चिंतक जॉर्ज बन्र्स ने परिवार के बारे में टिप्पणी की है कि आप देश, शहर या गांव के किसी भी हिस्से में रहें, खुशी उसी घर में आती है, जहां एकजुट परिवार रहता है और उनके सुख-दुख साझा होते हैं।

    ऊंचाई पर बने रहना मुश्किल

    दरअसल, व्यक्ति के वर्तमान और भविष्य का ढांचा परिवार की मजबूत नींव पर ही टिका होता है। घर-परिवार व संस्कार ऐसी चीजें हैं, जो हमें उस ऊंचाई पर स्थिर करने में मदद करती हैं, जो हमने अथक परिश्रम से हासिल की है। अगर हम इस डोर से खुद को तोड़ने की कोशिश करेंगे तो हमारा भी वही हाल हो सकता है, जो पतंग का हुआ। आप सफल रहने वालों का कोई भी उदाहरण देख लीजिए, पृष्ठभूमि में आपको परिवार और संस्कार जरूर मिलेंगे। एप्पल से हटा दिए जाने के बाद स्टीव जॉब्स ने नेक्स्ट और फिर पिक्सर कंपनी शुरू की। उन्हें एक खूबसूरत महिला लॉरीन से प्यार हुआ, जो उनकी पत्नी बनीं। जब एप्पल ने नेक्स्ट को खरीद लिया, वे फिर एप्पल में आ गए। फिर तरक्की दर तरक्की के साथ ही लॉरीन और उनका परिवार भी बढ़ा।

    जितनी गहरी जड़, उतनी ऊंचाई

    तरक्की का अर्थ, परंपरा व संस्कार से दूर नहीं, अपितु उसके और करीब जाना है। अथर्ववेद में भी लिखा गया है कि जिस परिवार में कलह नहीं होती, वहां लक्ष्मी निवास करती हैं। विद्वानों के अनुसार, संस्कार एवं परंपराएं हमारे सामाजिक स्वरूप का आधार हैं। बॉलीवुड अभिनेता मिलिंद गुणजी कहते हैं कि ग्लैमर वल्र्ड में काम करने के बाद भी हम अपनी संस्कृति से जुड़े हैं। भारतीय संस्कृति सिर्फ समृद्ध ही नहीं है, बल्कि यह परिवार के सदस्यों को अटूट बंधन से जोड़ती है। परिवार दूसरों की केयर करना सिखाता है। परिवार हमारी जड़ है। जड़ से उखड़कर हम जिंदा कैसे रह सकते हैं? सफलता की ऊंचाइयां कैसे छू सकते हैं? विद्वान जॉर्ज मूर भी कहते हैं कि अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए आप दुनिया का चक्कर लगा सकते हैं, लेकिन असली जरूरत एक भरा-पूरा घर-परिवार ही पूरी कर सकता है।

     परिवार, दोस्त और जीवन-मूल्य

    रिकी और एंटनी दोनों ने एक ही कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। रिकी को 80,000 डॉलर की जॉब मिली, एंटनी को कुछ नहीं मिला। रिकी हर दिन पार्टी में जाने लगा, एंटनी जीवन के संघर्ष में लगा रहा। रिकी को प्रमोशन मिल गया, लेकिन एंटनी अभी भी नौकरी के इंतजार में था। रिकी ने शेयर खरीदे, एंटनी के पास इनवेस्ट करने के लिए कुछ था ही नहीं। रिकी ने शेयर में सब कुछ गंवा दिया। उधर, एंटनी के जीवन में औसत-सी आमदनी और प्यार का समावेश हुआ। रिकी टूट गया, एंटनी ने विवाह करके घर संवारा। अब रिकी को शादी की चाहत थी। तब तक एंटनी पिता बन गया। रिकी धीरे-धीरे ड्रग्स की गिरफ्त में आ गया, जबकि एंटनी बच्चों के साथ खेलने लगा। रिकी ने सब कुछ गंवाया, एंटनी ने सब कुछ पा लिया। एंटनी के पास परिवार था, दोस्त थे और साथ में थे जीवन-मूल्य, लेकिन इनके बिना रिकी कटी पतंग की तरह जमीन पर आ गिरा। यह कहानी परिवार की महत्ता बताती है। स्वामी विवेकानंद भी कहते हैं कि आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम, ईमानदारी तथा उच्च मानवीय मूल्यों के बिना किसी का जीवन महान नहीं बन सकता है।

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