अमेरिकी ऑपरेशन धड़ाम, सिर्फ दो जहाज निकल पाए; ईरान ने हमले का आरोप खारिज किया
नई दिल्ली: विश्व व्यापार की धमनी माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हजारों जहाजों को निकालने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किया गया ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ महज 48 घंटे चला। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन में सिर्फ दो जहाजों को गाइड किया जा सका, जबकि करीब 1,600 जहाज अभी भी फंसे हुए हैं। इससे वैश्विक शिपिंग कंपनियों में निराशा फैल गई है और सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
छोटा ऑपरेशन, बड़ी उम्मीदें टूट गईं
प्रोजेक्ट फ्रीडम को शुरू करते समय ट्रंप प्रशासन ने इसे मानवीय और व्यापारिक राहत का बड़ा कदम बताया था। मगर हकीकत कुछ और ही निकली। सीएनएन समेत प्रमुख अमेरिकी मीडिया के अनुसार, ऑपरेशन शुरू होने के महज दो दिन बाद ही इसे रोक दिया गया।
शिपिंग कंपनियां अब अकेले ट्रांजिट का जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। कारण साफ है कि कार्गो और क्रू मेंबर्स दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। क्षेत्र में तनाव अभी भी इतना ज्यादा है कि बीमा कंपनियां भी बड़े रिस्क पर प्रीमियम बढ़ा रही हैं।
ईरान का साफ इनकार
इस बीच, दक्षिण कोरिया के एक जहाज (HMM Namu) पर हुए धमाके को लेकर भी विवाद गहराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे ईरान की कार्रवाई बताया था, लेकिन ईरान ने इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
ईरान के दूतावास (सियोल) ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेना का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं है।” ईरान ने आगे चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित गुजरने के लिए उसके जारी किए नियमों और चेतावनियों का पालन करना जरूरी है, खासकर जब क्षेत्र में “दुश्मन ताकतों” की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं।
क्यों फंस गए 1600 जहाज?
फरवरी से चले आ रहे ईरान-अमेरिका तनाव के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर प्रभावी नियंत्रण बढ़ा लिया था। इससे लगभग 20,000 से ज्यादा नाविक (सीफेयर्स) पानी के बीच फंस गए। संयुक्त राष्ट्र ने इसे “अभूतपूर्व मानवीय संकट” बताया है। खाने-पीने की चीजें, पानी और ईंधन की कमी अब गंभीर समस्या बनती जा रही है।
ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोकने का फैसला ईरान के साथ चल रही शांति वार्ताओं में “प्रगति” का हवाला देते हुए लिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं निकलता, जहाजों का फंसना जारी रह सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर:
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है। इस संकट से ऑयल कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं और सप्लाई चेन बाधित हो रही है।
बता दें कि भारत समेत कई देश इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक मार्ग दोनों प्रभावित हो रहे हैं। फिलहाल, ट्रंप का छोटा सा “फ्रीडम” मिशन ज्यादा सवाल छोड़कर चला गया है। अब नजरें ईरान-अमेरिका वार्ता पर टिकी हैं।







