बेसिक शिक्षा विभाग के नेतृत्व में स्कूलों में प्रेरक गाथाएं, प्रतियोगिताएं और डिजिटल प्रसारण- बालमन में रोपे गए संस्कारों का व्यापक उत्साह
लखनऊ, 26 दिसंबर 2025। आज वीर बाल दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश में एक ऐतिहासिक और भावुक आयोजन हुआ, जिसमें 75 जनपदों के लगभग 1.32 लाख परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 1.48 करोड़ से अधिक बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के मार्गदर्शन और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार आयोजित यह कार्यक्रम केवल औपचारिकता नहीं रहा, बल्कि बच्चों के मन में साहस, शौर्य, कर्तव्यबोध और राष्ट्रभक्ति के गहन संस्कार रोपित करने का सशक्त माध्यम बना।
विद्यालयों में सुबह की प्रार्थना सभा के बाद श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार वीर साहिबजादों – साहिबजादा जोरावर सिंह, फतेह सिंह, अजीत सिंह और जुझार सिंह – की प्रेरणादायी गाथाओं का वाचन किया गया। बच्चों को बताया गया कि उम्र नहीं, संकल्प और शौर्य ही इतिहास रचते हैं।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय मुख्य कार्यक्रम का लाइव डिजिटल प्रसारण सभी स्कूलों में दिखाया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों को संबोधित करते हुए साहिबजादों के बलिदान को याद किया और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया।
इस अवसर पर चित्रकला, कविता पाठ, निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण, वाद-विवाद तथा संवाद सत्र जैसी रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। शिक्षकों ने बच्चों को वीर बालकों के जीवन, उनके साहसिक निर्णयों और सामाजिक योगदान से परिचित कराया, जिससे बच्चों में प्रेरणा, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का विकास हुआ।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों तथा खंड शिक्षा अधिकारियों ने आयोजन की सतत निगरानी की। सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार किया गया, तथा जनपदों से फोटो, वीडियो और रिपोर्ट विभागीय स्तर पर संकलित की गईं। स्कूल शिक्षा की महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा कि वीर बाल दिवस के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रेरक गाथाओं से जोड़कर मूल्य-आधारित, नेतृत्वपरक और आत्मविश्वासपूर्ण शिक्षा को और मजबूत किया गया है।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि यह दिवस बच्चों में साहस, आत्मविश्वास और राष्ट्रप्रेम के संस्कारों को सुदृढ़ करता है। प्रदेश के हर विद्यालय तक यह संदेश पहुंचा कि इतिहास उम्र से नहीं, संकल्प और शौर्य से रचा जाता है। यह आयोजन उत्तर प्रदेश में बच्चों को न केवल इतिहास से जोड़ने, बल्कि उन्हें राष्ट्रनिर्माण के सच्चे योद्धा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।







