बाल कहानी:-मोहम्मद साजिद खान
कालू भेड़िया बड़ा ही फुर्तीला था। छोटे जानवरों को उठाकर यो भाग छुपता कि सभी ढूंढते रह जाते हैं। इधर जब से उसे सफेद खरगोश के बच्चे मोनू को पकड़ा था। मन में हलचल मच गई थी। वह बहुत ही भोला बच्चा था। अपने कुशल व्यवहार और मीठी मीठी बातों के कारण वह सभी को सभी का चाहता था। जब यह बात खरगोश परिवार के मुखिया झबरी ने सुनी है तो वह सभी तो वह भी रो पड़ा क्योंकि मोनू रोज शाम उसी के पास बैठ कर बातें करता था।
अब क्या होगा झबरीले ने उदास मन से कहा कालू भेड़िए ने तो नाक में दम कर रखा था। यदि उसे सबक सिखाया नहीं गया तो हमारा जीना दुश्वार हो जाएगा खरगोशों ने भी अपनी -अपनी राय व्यक्त की लेकिन कोई हल नहीं निकल सका मोनू का एक मित्र था, गोलू खरगोश मोनू शहर में उसी के साथ पढ़ता था।
इधर गोलू छुट्टियां बिताने चाचा के घर आया था जब उसने मोनू के बारे में सुना तो बहुत दुखी हुआ। उसने तय कर लिया कि वह इस दुष्ट कालू को सबक सिखाएगा। वह दूसरे ही दिन वन आ पहुंचा। झबरीले उसका स्वागत किया और समझाया कालू बहुत चालाक है उसे यूं ही नहीं पकड़ा जा सकता। आप चिंता ना करें मुखिया जी मैं सबकुछ लूंगा।
तब तक मोनू की मां नाश्ता ले आई गोलू ने भी नाश्ता किया तथा सभी से कालू की गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्रित की। अगले दिन जब गोलू उठा तो अधिक दिन निकल आया था। उसने फ़ौरन नहा धोकर नाश्ता किया फिर घूमने के लिए निकलने लगा तभी मोनू की मां ने हिदायत दी। ‘बेटा सतर्क रहना कालू कभी भी हमला कर सकता है’।
गोलू टहलते- टहलते वन के बीच बने जंगल में तालाब के पास जा पहुंचा। तालाब पर जानवरों की खूब भीड़ थी कुछ नहा रहे थे तो कुछ अठखेलियां कर रहे थे गोलू का मन भारी था। अतः वह तालाब के दूसरे छोर पर जा पहुंचा यहां उसे शांति मिल रही थी।
अभी वह चुपचाप बैठा ही था की आवाज आई ‘क्यों भाई सभी जानवर आनंद ले रहे हैं और तुम यहां निर्जन उदास बैठे हो। ‘बोलो ना’ उसने पीछे पलट कर देखा एक कछुआ पानी से निकलकर बहार तक आ गया था उसने कहा ‘क्या करूं उधर मन ही नहीं लग रहा था तो इधर चला आया’। फिर जब कछुआ ने गोलू से उदासी का कारण पूछा तो उसने सारी बात बता दी। कछुआ बड़ा चलाक था उसे एक युक्ति सूझी ‘अगर चाहो तो मैं उसे सबक सिखाने मैं तुम्हारी कुछ मदद करूं’।
वह कैसे भाई? गोलू उत्सुक हो उठा था जानने के लिए। ‘लेकिन इस कार्य में तुम्हें थोड़ा सा जोखिम उठाना होगा मैं अपने मित्र के लिए जान भी दे सकता हूं गोलू ने निर्भीकता से कहा कछुआ बोला तो ठीक है समझ लो हमें उस दोस्त से मुक्ति मिल गई फिर उसने गोलू को सारी युक्ति समझा दी शाम हो रही थी। अतः गोलू घर लौट आया।
अगले दिन जब वह तालाब के किनारे टहलने लगा। तो कालू ने उसे देख लिया फिर मौका पाकर कालू ने उस पर छलांग लगाई और गोलू को धर दबोचा गोलू पहले तो डर से थर्रा उठा लेकिन शीघ्र ही अपने को संभालता हुआ बोला ‘मुझे क्यों पकड़ लिया। छोड़ो मुझे घर जाना है’। घर जाओगे कालू हंसने लगा- ‘जाओगे तो तुम अब मेरे पेट में। ‘लेकिन मेरा कसूर तो बताओ।’ यही कि तुम अपने को बड़े चालाक समझते हो।
और अपने मित्र की मौत बदला लेने आए हो। कालू गुस्से से गुर्राया। तुम्हें अपने मित्र से बड़ा प्यार है ना आज मैं तुम्हें उसी के पास पहुंचा दूंगा। गोलू बोला अब तो मैं तुम्हारे चंगुल में फंस गया हूं। लेकिन सोचो तो सही मरने वाले की एक इच्छा अवश्य पूरी की जाती है। कालू बड़े जोर से बोला हां- हां बोल क्या चाहिए तुझे। कालु का दिल इतना छोटा भी नहीं कि वह तेरी आखिरी इच्छा भी ना पूरी कर सके। वह बोला – ‘सूर्य देवता की पूजा करना चाहता हूं’।
यह कौन सी बड़ी बात है ले छोड़ दिया चलाक मत बनना नहीं तो फाड़कर कीमां बना दूंगा। गोलू दूसरी ओर मुंह करके हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। गोलू तो आंखें मूंदे था लेकिन कालू से आंखें फाड़-फाड़कर देखे जा रहा था, कि वह कि कहीं वह भाग न जाए।
इधर सूर्य की रोशनी बढ़ गई थी। अतः कालू की आंखें चौंधिया गई उसे धुंधला दिखने लगा इसी का फ़ायदा उठा कर अब तक गोलू कछुए की पीठ पर सवार हो चुका था और कछुआ आगे बढ़ गया था। तब गोलू ने शांति भंग की ‘लो भाई अब मुझे खा लो’। गोलू ने ही कहा था कि देर से इंतजार कर रहा है कालू झपट पड़ा लेकिन उसे कुछ स्पष्ट नहीं दिखा। अत: वह पानी में गिर कर डुबकियां लेने लगा।
गोलू अपनी सफलता पर जोर से हंसा’ क्यों पानी ठंडा लग रहा है ना’। मुझे तुमने मुझे धोखा दिया मुझे बाहर निकालो कालू गिड़गिड़ाया अरे भाई तुम भी स्नान करके सूर्य देवता की पूजा कर लो न। हो सकता है मेरी तरह सूर्य देवता तुम्हें भी प्रसन्न हो जाए और तुम्हारी भी जान बच जाए। कहकर गोलू हंसता हुआ चला गया कछुआ पानी में चला गया कालू गिडागिड़ता ही रह गया।







