जी क़े चक्रवर्ती
अवनत्ति पुर देश मे वीरपाल नाम का एक राजा हुआ करता था। उसका राज्य बहुत बड़ा था। एक दिन उसके मन मे पूरा देश घूमने का विचार आया और उसने अपना सम्पूर्ण देश भ्रमण की योजना बनाई और फिर एक दिन सुबह-सुबह राजा घूमने निकल पड़े। राजा देश के एक छोर से दूसरे छोड़ तक बहुत दूर तक घूमते हुए निकल गये और जब वह यात्रा से लौट कर अपने महल में पहुंचे, तो उन्होंने अपने मंत्रियों से पैरों में दर्द होने की शिकायत की। राजा का कहना था कि मार्ग में जो कंकड़-पत्थर पड़े हुये थे वे मेरे पैरों में चुभ कर घुस गये, दोबारा उसी सड़क से यात्रा करने के लिए हमे कुछ इंतजाम करना पड़ेगा ऐसा सोचते हुए राजा कुछ देर विचार करने के बाद उसने अपने मंत्रियों को आदेश दिया कि देश की संपूर्ण सड़कें को चमड़े से ढंक दी जाएं। राजा का यह आदेश सुन कर सभी दरबारी बहुत आश्चर्य चकित हुये। लेकिन किसी ने कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह तो निश्चित ही था कि इस काम के लिए बहुत सारे धन की जरूरत पड़ती। लेकिन फिर भी किसी दरबारी ने राजा से कुछ नहीं कहा। सभी लोग चुप रहे।
कुछ देर के बाद राजा का एक बुद्घिमान मंत्री सुमंत उनके पास पहुंच कर राजा से कहा महाराज मै आपको एक सुझाव देना चाहता हूं। यदि आप मुझे आज्ञा दे तो मैं आप से कहूँ। उसने राजा से डरते-डरते कहा- उसकी बात सुनकर पहले तो राजा को उसके ऊपर बहुत क्रोध आया फिर भी राजा ने उससे कहा कि अच्छा आज्ञा है जल्दी से बताओ तब मंत्री ने राजा से कहा महाराज! यदि आप इतने रुपयों को अनावश्यक रूप सड़कों को चमड़े से ढकवा कर खर्च करके धन बर्बाद करने से बचा सकते हैं, यदि आप चाहें तो मै आपके इन रुपयों को बचा सकता हूँ मेरे पास आपके इन रुपयों को बचाने की एक अच्छी तरकीब है, जिससे आपकी समस्या का हल भी हो जाएगा और हम अनावश्यक रुपयों की बर्बादी से भी बच जाएंगे।
यह बात मंत्री के मुहं से सुनकर राजा बहुत आश्चर्यचकित हुआ क्योंकि पहली बार किसी ने उसकी आज्ञा के उल्लंघन करने की बात कही।
तब राजा ने अपने मंत्री से कहा- अच्छा बताओ तुम्हारा क्या सुझाव है?
मंत्री ने कहा- महाराज! पूरे देश की सड़कों को चमड़े से ढंकने के स्थान पर यदि आप चमड़े के एक टुकड़े का उपयोग कर अपने पैरों को लिये एक जोड़ी जूता क्यों नहीं सिलवा लेते हैं राजा ने अचरज भरे दृष्टि से मंत्री को देखते हुये कहा कि तुम्हारा सुझाव तो बहुत ही अच्छा है, और राजा उसके सुझाव को मानते हुए अपने पैरों के लिए एक जोड़ी जूता बनवाने का आदेश दे दिया।
- सीख: बच्चों इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है कि हमे सदैव ऐसे हल के विषय में सोचना चाहिए जो सबसे सरल और उपयोगी हो। शीघ्रता में असहज एवं अव्यावहारिक हल का सोचना बुद्धिमानी नहीं है। दूसरों लोगों के साथ बातचीत करके भी अच्छे एवं व्यवहारिक हल निकाले जा सकते हैं।







