बहुत समय पहले की बात है। गंधर्व नगर में एक अमीर सौदागर रहता था। उसे जानवरों की मूर्तियां का संकलन करने का बहुत शौक था। उसके पास बहुत सारे जानवरों की मूर्तियां थी लेकिन चूहे की मूर्तियां नहीं थी। एक दिन उसने 2 कारीगर को बुलवाया और उनसे बोला- ‘तुम दोनों मेरे लिए एक -एक चूहा बनाओ। चूहे बिल्कुल असली मालूम हो, मेरी बिल्ली भी देखें तो धोखा खा जाए और उसे सचमुच का चूहा समझकर उस पर झपट पड़े। मैं दोनों चूहे उसके पास रखूंगा और जिस चूहे पर बिल्ली सबसे पहले झपटेगी। उस चूहा बनाने वाले को मैं अशर्फियों की एक शैली ईनाम में दूंगा।
इतना सुनते वह कारीगर अपने- अपने घर जाकर काम में लग गए। कुछ दिनों बाद वह दोनों कारीगर सौदागर के पास पहुंचे और अपना-अपना बनाया हुआ चूहा पेश किया।
एक कारीगर ने लकड़ी का एक बहुत ही खूबसूरत चूहा बनाया था, जो देखने में बिल्कुल असली और जीता जागता मालूम होता था लेकिन दूसरे कारीगर का चूहा अच्छा नहीं था जो भी उसे देखता हंसने लगता। सौदागर ने भी दोनो चूहे को देखा और बोला वह लकड़ी का चूहा बहुत सुंदर है लेकिन इस चूहे को चूहा नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह ना जाने कौन सी बला दिख रहा है यह सुनकर कारीगर ने कहा- ‘जनाब’ आप बिल्ली को लाइए वह खुद फैसला कर लेगी कि दोनों में से कौन सा अच्छा है। यह सुनकर सौदागर ने चूहे को पास- पास रख दिया और बिल्ली को मंगवाया जैसे ही बिल्ली कमरे में दाखिल हुई दूसरे कारीगर के बनाए हुए चूहे की तरफ फ़ौरन झपट पड़ी। उसने पहले कारीगर के चूहे को देखा तक भी नहीं।
यह सब देखकर सौदागर बड़ा ही हैरान था। उसने शर्त के मुताबिक उसने दूसरे कारीगर को इनाम दिया और पूछा तुम्हें इनाम तो मिल गया। अब यह बताओ तुमने यह कमाल कैसे कर दिया। कारीगर बोला- ‘बात यह है सरकार कि मैंने अपना चूहा लकड़ी के बजाय सूखी मछली से बनाया था। इसलिए उसे देखते ही बिल्ली उस पर झपट पड़ी। यह सुनकर सौदागर हंस- हंस कर लोटपोट हो गया फिर उसने कहा तुम दोनों ने बहुत खूबसूरत चूहा बनाया है अब मैं दोनों चूहे अपने पास रखूँगा एक से मेरी बिल्ली खेलेगी और दूसरा चूहा मैं अपने पास रखूँगा।
फिर उसने कहा अब मुझे एक के बजाये दो थैलियां देनी पड़ेगी एक उस कारीगर को जिसने लकड़ी का बड़ा खूबसूरत चूहा बनाया और दूसरा उस कारीगर को जिसने अपनी ‘अक्ल’ से बिल्ली को बेवकूफ बनाया।
-नीतू सिंह







