काफी समय पहले की बात है, एक व्यापारी था। वह व्यापार करने के लिए किसी दूर देश में जा रहा था। रास्ते में रात हो गई तो वह एक गांव में एक गरीब आदमी की झोपड़ी में ठहर गया। रात बिता कर बड़े तड़के ही आगे बढ़ गया। उसके चले जाने के बाद गरीब की स्त्री ने देखा कि एक तरफ को कुछ पड़ा है तो उसने उसे उठा लिया है। उसे देखते ही एक चीख उसके मुंह से निकल गयी, उसका आदमी बाहर कुछ काम कर रहा था वह दौड़कर अंदर आया। स्त्री ने कहा ‘देखो तो यह क्या गजब हो गया है’। उसने देखा तो वह अशर्फियों की थैली थी। स्त्री पुरुष दोनों परेशानी में पड़ गए, व्यापारी तो बहुत पहले ही जा चुका था।
उन्होंने तो उससे यह भी नहीं पूछा था कि वह कहां से आया और कहां जाएगा। अब क्या होगा स्त्री ने कहा आदमी बोला अब हम कर भी क्या सकते हैं। फिर थैली उन्होंने रख ली और उस आदमी के आने की प्रतीक्षा करने लगे। उन्हें विश्वास था कि इतनी बड़ी रकम खो जाने पर वह ढूंढता हुआ अवश्य आएगा, पर दिन पर दिन बीत गए और वह आदमी नहीं आया। एक दिन जब थैली के गुम होने का व्यापारी को उसे पता चला तो उसे उस ने समझ लिया कि कहीं रास्ते में गिर गई और कोई लेकर चंपत हो गया, व्यापारियों के जीवन में ऐसी घटनाएं होना तो मामूली बात है।
काफी दिनों बाद एक दिन वह लोग क्या देखते हैं कि वही व्यापारी लौट कर आया, वह आगे बढ़ रहा था कि उन्होंने उसे रोका और झोपड़ी में अंदर ले जाकर वह थैली उसके सामने रख दी। व्यापारी को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ! उसने कहा ‘आप आदमी नहीं फरिश्ता’ हैं। आप लोगों ने जो किया है वह फरिश्ते ही कर सकते हैं पैसे का लालच बहुत बड़ा और बुरा होता है। वह आदमी को शैतान बना देता है। इतना कहकर कुछ अशर्फियां उन्होंने देनी चाहिए लेकिन उन्होंने लेने से इंकार कर दिया कहां आप की थैली आपके पास पहुंच गई इससे बड़ा इनाम हमारे लिए और क्या हो सकता है।







