नई दिल्ली 08 जनवरी 2018। सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र में बीफ बैन मामले में फ़रवरी के तीसरे सप्ताह में सुनवाई करेगा। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन पक्षों को अतरिक्त जवाब दाखिल करना है, वे अगली सुनवाई से पहले अपने जवाब दाखिल कर दें। महाराष्ट्र के कुरैशी समाज समेत कई संगठनों ने महाराष्ट्र में बीफ बैन को चुनौती दी है। वहीं, कुछ गैर सरकारी संगठनों ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर बीफ को पूरी4 तरह प्रतिबंधित करने की मांग की है।
याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। कुरैशी समाज द्वारा कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि 16 साल से बड़ी उम्र के बैल किसान के किसी काम के नहीं हैं। ऐसे में किसान उन्हें बेचकर पैसा भी कमा सकते हैं। इस पाबंदी से लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं। इसलिए राज्य में 16 साल से ऊपर के बैलों की मांस के लिए वध की इजाजत दी जाए। याचिका में कहा गया है कि इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट के बीफ खाने की इजाजत के फैसले के खिलाफ अखिल भारतीय कृषि गोसेवा संघ व कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इससे पहले बीफ बैन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया था।
महाराष्ट्र में जारी बीफ बैन पर बड़ा फैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने जुलाई 2016 में जुलाई बीफ पर पाबंदी जारी रहने का फैसला दिया था, लेकिन बीफ खाने पर लगी पाबंदी को उठाते हुए अन्य राज्यों से महाराष्ट्र में बीफ लाकर बेचने की इजाजत दे दी थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्य में बीफ पर पाबंदी जारी रहेगी, लेकिन बाहर के राज्यों से (जिन राज्यों में इसकी इजाजत है) महाराष्ट्र में बीफ लाया जा सकता है और लोग बीफ खा भी सकते हैं। बीफ रखने वालों को सारे सबूत हमेशा रखने होंगे, जिससे कभी कोई शिकायत आए तो वो खुद को निर्दोष साबित कर सकें। ऐसे में उस व्यक्ति पर कानूनी कारवाई नहीं हो सकती है।







