पटना, 20 जुलाई, 2018: बिहार संग्रहालय, पटना में ‘भारतीय मुद्रा की यात्रा’ प्रदर्शनी समारोह के तहत आज आयोजित व्याख्यान में नागपुर से आये सिक्कों के विद्वान प्रशांत कुलकर्णी ने मुद्रा से पहले और बाद की स्थिति पर अपना व्याख्यान दिया। इस दौरान म्यूजियम के डायरेक्टर युसूफ जी भी मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि वस्तु के आदान – प्रदान में पहले वस्तु विनिमय और उसके बाद सिक्कों का चलन शुरू हुआ। वैदिक काल की कथा के अनुसार, उर्वसी ने राजा से पूछा कि क्या एक इंद्र के बदले 10 हजार गाये मिलेंगी। तब एक इंद्र की मूर्ति की कीमत 10 हजार गायें होती थी। ये प्रसंग ऋगवेद में मिलता है। भारत में सिक्कों का इतिहास पुराना है।
उन्होंने स्लाइड शो के जरिये शुंग कालीन मुद्रा के बारे में भी विस्तार से बताया। साथ ही उन्होंने मुद्रा आने से पहले व्यापार के बारे में बताया और मेसोपोटामिया समेत अन्य जगहों के ईयर रिंग के इस्तेमाल के बारे में बताया कि लोग उस समय वस्तु खरीदने के लिए ईयर रिंग का भी इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा भी कई अन्य चीजें थी, जिसके जरिये व्यापार होता था।
प्रशांत कुलकर्णी ने बिहार म्यूजिम के बारे में कहा कि इतनी बडी प्रोपर्टी मैंने पहली बार देखी है। मैं इससे पहले ब्रिटिश म्यूजियम देखा है, मगर ये उससे भी अदभुत है। यहां एक्टिविटी के तौर पर वो सब हो रहा है, जो ब्रिटिश म्यूजियम में होता है। यहां का एग्जीवीशन देखा, वो यूरोप में देखने को मिलता है। बिहार में इस तरह की चीज देख कर गर्व महसूस होता है। मैं इसके लिए यहां की सरकार को भी बधाई देना चाहूंगा। बता दें कि यह व्याख्यान 21 जुलाई को भी आयोजित होगा।







