Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, June 7
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    ट्रैफिक की मुश्किल में जूझती जान?

    By April 7, 2019 Current Issues 1 Comment5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 661

    पंकज चतुर्वेदी

    पिछले दिनों मेरठ-देहरादून को दिल्ली से जोड़ने वाले हाईवे पर 14 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। दिल्ली, मुंबई तो ठीक है लेकिन देश के सभी छह महानगर, सभी प्रदेशों की राजधानियों के साथ-साथ तीन लाख आबादी वाले 600 से ज्यादा शहरों-कस्बों शहरों में भी सड़क के आकार की तुलना में कई गुणा बढ़े वाहनों के दबाव के चलते जाम लगना आम बात है। अभी एक रिपोर्ट बताती है कि लखनऊ में हर दिन औसतन 11 मौतें होती हैं। यह बेहद गंभीर चेतावनी है कि आने वाले दशक में दुनिया में वायु प्रदूषण के शिकार सबसे ज्यादा लोग दिल्ली में होंगे। एक अंतर्राष्ट्रीय शोध रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर प्रदूषण स्तर को काबू में नहीं किया गया तो साल 2025 तक दिल्ली में हर साल करीब 32,000 लोग ज़हरीली हवा के शिकार होकर असामयिक मौत के मुंह में जाएंगे।

    ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित ताजा शोध के मुताबिक दुनियाभर में 33 लाख लोग हर साल वायु प्रदूषण के शिकार होते हैं। यही नहीं, सड़कों में बेवजह घंटों फंसे लोग मानसिक रूप से भी बीमार हो रहे हैं व उसकी परिणति के रूप में आए रोज सड़कों पर ‘रोड रेज’ के तौर पर बहता खून दिखता है। वाहनों की बढ़ती भीड़ के चलते सड़कों पर थमी रफ्तार से लोगों की जेब में होता छेद व विदेशी मुद्रा व्यय कर मंगवाए गए ईंधन का अपव्यय होने से देश का नुकसान है सो अलग। सड़कों पर रास्ता न देने या हार्न बजाने या ऐसी ही गैरजरूरी बातों के लिए आए रोज खून बह रहा है। बीते दो दशकों के दौरान देश में ऑटोमोबाइल उद्योग ने बेहद तरक्की की है और साथ ही बेहतर सड़कों के जाल ने परिवहन को काफी बढ़ावा दिया है। विडंबना है कि हमारे यहां बीते इन्हीं सालों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की उपेक्षा हुई व निजी वाहनों को बढ़ावा दिया गया। रही-सही कसर बैंकों के आसान कर्ज ने पूरी कर दी और अब इंसान दो कदम पैदल चलने के बनिस्बत दुपहिया ईंधन वाहन लेने में संकोच नहीं करता है। असल में सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे लोग इस खतरे से अनजान ही हैं कि उनके बढ़ते तनाव या चिकित्सा बिल के पीछे सड़क पर रफ्तार के मजे का उनका शौक भी जिम्मेदार है।

    शहर हों या हाइवे,जो मार्ग बनते समय इतना चौड़ा दिखता है, वही दो-तीन सालों में गली बन जाता है। महानगर से लेकर कस्बे तक और सुपर हाइवे से लेकर गांव की पक्की हो गई पगडंडी तक, सड़क पर मकान व दुकान खोलने व वहीं अपने वाहन या घर का जरूरी सामान रखना लोग अपना अधिकार समझते हैं। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि लुटियन दिल्ली में कहीं भी वाहनों की सड़क पर पार्किंग गैरकानूनी है। जाहिर है कि जो सड़क वाहन चलने को बनाई गई उसके बड़े हिस्से में बाधा होगी तो यातायात प्रभावित होगा ही।
    यातायात जाम का बड़ा कारण सड़कों का त्रुटिपूर्ण डिजाइन भी होता है, जिसके चलते थोड़ी-सी बारिश में वहां जलभराव या फिर मोड़ पर अचानक यातायात धीमा होने या फिर आए रोज उस पर गड्ढे बन जाते हैं। पूरे देश में सड़कों पर अवैध और ओवरलोड वाहनों पर तो जैसे अब कोई रोक है ही नहीं। पुराने स्कूटर को तीन पहिये लगाकर बच्चों को स्कूल पहुंचाने से लेकर मालवाहक बना लेने या फिर बामुश्किल एक टन माल ढोने की क्षमता वाले छोटे स्कूटर पर लोहे की बड़ी बॉडी कसवा कर अंधाधुंध माल भरने, तीन सवारी की क्षमता वाले टीएसआर में आठ सवारी व जीप में 25 तक सवारी लादने फिर सड़क पर अंधाधुंध चलने जैसी गैरकानूनी हरकतें कश्मीर से कन्याकुमारी तक स्थानीय पुलिस के लिए ‘सोने की मुर्गी’ बन गए हैं। इसके अलावा मिलावटी ईंधन, घटिया ऑटोपार्ट्स भी वाहनों से निकले धुएं के ज़हर को कई गुना कर रहे हैं। सनद रहे कि वाहन पर क्षमता से ज्यादा वजन होगा तो उससे निकलने वाला धुआं जानलेवा ही होगा।

    आमतौर पर स्कूलों का समय सुबह है और अब लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, इसका परिणाम हर छोटे-बड़े श्ाहर में सुबह से सड़कों पर जाम के रूप में दिखता है। ठीक यही हाल दफ्तरों के वक्त में होता है। नए मापदंड वाले वाहन यदि चालीस या उससे अधिक की स्पीड में चलते हैं तो उनसे बेहद कम प्रदूषण होता है। लेिकन यदि ये पहले गियर में रेंगते हैं तो इनसे सॉलिड पार्टिकल, सल्फर डाइआक्साइड व कार्बन मोनोआक्साइड बेहिसाब उत्सर्जित होता है। क्या स्कूलों के खुलने व बंद होने के समय में अंतर या बदलाव कर इस जाम के तनाव से मुक्ति नहीं पाई जा सकती है? कुछ कार्यालयों की बंदी का दिन शनिवार-रविवार की जगह अन्य दिन किया जा सकता है, जिसमें अस्पताल, बिजली, पानी के बिल जमा होने वाले काउंटर आदि हैं। यदि कार्यालयों में साप्ताहिक दो दिन के बंदी के दिन अलग-अलग किए जाएं तो हर दिन कम से कम 30 प्रतिशत कम भीड़ सड़क पर होगी। कुछ कार्यालयों का समय आठ या साढ़े आठ करने व उनके बंद होने का समय भी साढ़े चार या पांच होने से सड़क पर एकसाथ भीड़ होने से रोका जा सकेगा।

    बड़े-बड़े शहरों में जो कार्यालय जरूरी न हों, या राजधानियों में, जिनका मंत्रालयों से कोई सीधा ताल्लुक न हो, उन्हें सौ-दो सौ किलोमीटर दूर के शहरों में भेजना भी एक परिणामकारी कदम हो सकता है। इससे नए शहरों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे व लोगों का दिल्ली की तरफ पलायन भी कम होगा।

    Keep Reading

    तपती रातें और झुलसाती गर्मी: स्वास्थ्य संकट की नई चेतावनी

    Preparations Underway for a Prolonged War! US Ferries Massive Military Hardware to West Asia, Planning Another Powerful Strike Against Iran.

    पश्चिम एशिया में शांति वार्ता: संवाद की बजाय दबदबा बनाए रखने की होड़

    Haridwar's Rajaji National Park: Here, the jungle itself will tell you its stories!

    हरिद्वार का राजाजी नेशनल पार्क: यहां जंगल खुद आपको अपनी कहानियां सुनाएगा!

    योगी का जन्मदिन “महिलाओं का सुरक्षा दिवस”

    Why is everyone today suffering from depression and gripped by fear?

    आज हर कोई अवसाद से ग्रस्त और भय से व्याप्त क्यों?

    The Cruelty of Bureaucracy: A Citizen Driven to the Brink of Self-Immolation Over ₹52,900

    अफसरतंत्र की क्रूरता: ₹52,900 के लिए आत्मदाह की कगार पर एक नागरिक

    View 1 Comment

    1 Comment

    1. gmail account login on January 2, 2020 3:14 pm

      I gotta favorite thiѕ internet site іt ѕeems handy verү helpful.

      Reply
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    कर्नाटक में दुखद हादसा: जंगली हाथी के हमले में IPS अधिकारी की पत्नी की मौत

    June 6, 2026
    Defence Minister Rajnath Singh’s interaction with party workers: Assurance given to resolve public grievances.

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कार्यकर्ता संवाद: जनसमस्याओं पर सुलझाने का आश्वासन

    June 6, 2026
    Calls for Dharmendra Pradhan's resignation intensify: Nationwide protests over NEET paper leak.

    धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जोरों पर: नीट पेपर लीक पर देशभर में प्रदर्शन

    June 6, 2026
    Stir in Vrindavan: Comedians Johnny and Jojo, who made Premanand Maharaj laugh, go missing.

    वृंदावन में हड़कंप: प्रेमानंद महाराज को हंसाने वाले कॉमेडियन जॉनी-जोजो लापता

    June 6, 2026
    Sezal Sharma Finds a Treasure of Peace in the Streets of Prague

    प्राग की गलियों में खो गईं सेज़ल शर्मा, मिला आत्मिक सुकून

    June 6, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading