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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    पीओके में भीतरी बगावत बनी पाकिस्तान के लिए सबसे गंभीर चुनौती

    ShagunBy ShagunJune 19, 2026 Current Issues No Comments4 Mins Read
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    • हाल- ए बयां – पड़ोसी का : 1947 के बाद सबसे बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल
    • पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चल रहा आंदोलन

    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चल रहा व्यापक आंदोलन पाकिस्तान के लिए 1947 के विभाजन के बाद की सबसे गंभीर आंतरिक चुनौती बन गया है। प्रथम दृष्टया यह मुद्दा विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों तक सीमित लगता है, लेकिन वास्तव में यह वर्षों से जमा आर्थिक उपेक्षा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी, क्षेत्रीय पहचान और पाकिस्तानी सेना-राजनीतिक व्यवस्था के अत्यधिक हस्तक्षेप के विरुद्ध गहरा असंतोष है।

    यह केवल एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि पाकिस्तान की पूरी कश्मीर नीति और शासन व्यवस्था के विरुद्ध भीतर से उठी बगावत है।

    तात्कालिक वजह: 12 आरक्षित सीटों का विवाद

    वर्तमान आंदोलन की सबसे प्रत्यक्ष वजह पीओके विधानसभा की 45 में से 12 सीटों को खत्म करने की मांग है। ये सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 के बाद भारतीय जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान चले गए थे।

    file photo

    पाकिस्तान सरकार का तर्क है कि ये सीटें पूरे कश्मीर पर उसके दावे को मजबूत करती हैं। लेकिन पीओके के स्थानीय लोगों का कहना है कि जो लोग न यहां रहते हैं और न ही स्थानीय समस्याओं से जुड़े हैं, उन्हें एक-चौथाई सीटों पर प्रतिनिधित्व क्यों दिया जाए? इससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है।

    पीओके सर्वोच्च न्यायालय ने इन सीटों को संवैधानिक संरक्षण देते हुए कहा है कि इन्हें खत्म करने के लिए संवैधानिक संशोधन आवश्यक होगा। पर यह कानूनी मुद्दा अब गहरा राजनीतिक संकट बन चुका है।

    जेएएसी: आंदोलन का केंद्र

    आंदोलन का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) कर रही है, जिसका गठन 2023 में हुआ था। शुरू में यह संगठन बिजली दरों में वृद्धि, गेहूं सब्सिडी की कमी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक मुद्दों पर उभरा था। धीरे-धीरे इसमें राजनीतिक मांगें शामिल हो गईं – पूर्ण राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संस्थागत सुधार और क्षेत्रीय स्वायत्तता।

    आर्थिक संकट ने लोगों को व्यवस्था की जड़ों पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित किया है। मुजफ्फराबाद और रावलाकोट में हजारों लोगों के सड़कों पर उतरने, प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलन का जारी रहना इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है।

    क्षेत्रीय पहचान और आर्थिक शोषण की शिकायतें

    पीओके के लोगों में पाकिस्तानी अभिजात्य वर्ग के प्रति गहरा असंतोष है। सांस्कृतिक और भाषाई निकटता के बावजूद वे खुद को अलग राजनीतिक पहचान वाला समुदाय मानते हैं।

    मुख्य आर्थिक शिकायतें:

    विशाल जलविद्युत परियोजनाओं (जैसे मंगला बांध) के बावजूद स्थानीय लोगों को महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है।
    परियोजनाओं से हजारों लोग विस्थापित हुए, लेकिन लाभ पाकिस्तान के अन्य हिस्सों को पहुंचे।
    विकास की कीमत पीओके के लोगों ने चुकाई, जबकि फायदे इस्लामाबाद और अन्य क्षेत्रों को मिले।

    पाकिस्तान की दोहरी नीति का पर्दाफाश

    पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को कश्मीरियों का सबसे बड़ा समर्थक बताता रहा है और आत्मनिर्णय का नारा लगाता है। लेकिन पीओके में वही पाकिस्तान सुरक्षा बलों की भारी तैनाती, इंटरनेट बंदी, सामूहिक गिरफ्तारियां और बल प्रयोग कर रहा है।

    मानवाधिकार संगठनों ने अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं। पीओके की संवैधानिक स्थिति शुरू से ही अस्पष्ट रही है – नाम का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विधानसभा तो है, लेकिन रक्षा, विदेश नीति और महत्वपूर्ण निर्णय इस्लामाबाद से होते हैं।

    व्यापक संदर्भ: पाकिस्तान का आंतरिक संकट

    पीओके का आंदोलन अलग-थलग घटना नहीं है। यह बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में चल रहे असंतोष का हिस्सा है। पाकिस्तान में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संघीय ढांचे की कमजोरी, आर्थिक संकट और सैन्य-नागरिक तनाव एक बड़े अस्थिर वातावरण को जन्म दे रहे हैं।

    सरकार ने जेएएसी पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिए और आंदोलन को राष्ट्र-विरोधी करार दिया है। लेकिन इतिहास गवाह है कि केवल दमन से गहरे राजनीतिक असंतोष का समाधान नहीं होता।

    भीतरी बगावत और भविष्य की चुनौती

    पीओके में उठी आवाज शासन, पहचान और राजनीतिक वैधता के बीच चल रहे संघर्ष की अभिव्यक्ति है। लोग अपने भविष्य पर अधिक नियंत्रण चाहते हैं और लंबे समय से थोपी गई व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। यह बगावत पाकिस्तान की राजनीति, सुरक्षा नीति और कश्मीर संबंधी दावों पर दूरगामी असर डाल सकती है। यदि इस्लामाबाद ने समय रहते राजनीतिक समाधान नहीं निकाला तो यह आग पूरे क्षेत्र में फैल सकती है।

    पीओके की सड़कें आज जो तस्वीरें दिखा रही हैं, वे पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी हैं।

    Shagun

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