जी के चक्रवर्ती
12 मई को हुए कर्नाटक चुनाव के नतीजे चुनाव मशीन में कैद हो चुके हैं, यहां पर कांग्रेस एवं बीजेपी दोनों ही पार्टियों के लिए अलग-अलग वजहों से महत्वपूर्ण हैं लेकिन कांग्रेस के लिए इनके चुनावों की खास अहमियत कई अन्य वजहों से भी है? जिसमे से पहला, यदि कांग्रेस जीत गई तो पार्टी के पास यह कहने का मौका होगा कि 2014 के आम चुनावों की करारी हार से सबक लेते हुए कांग्रेस ने अपने आप को पहले से ज्यादा मजबूत किया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी वर्ष 2019 में होने वाले चुनाव में पीएम मोदी को चुनौती देने के लिए विपक्ष के केंद्रीय नेता बनकर उभरे सकते हैं।
कर्नाटक में चुनाव के संपन्न होने के बाद तमाम एग्जिट पोल के नतीजे भी आ चुके हैं जिसमे छःह एग्जिट पोल्स ने बीजेपी को एवं पांच ने कांग्रेस को सबसे बड़ी पार्टी के रूप जीत दर्ज करने का अनुमान लगाया है। जबकि इनमें से अधिकतर एग्जिट पोल्स ने किसी भी पार्टी को एक तिहाई सीटें नहीं ला पाने की बात कही हैं, जिससे की उनकी सरकार बन सके। लगभग सभी एग्जिट पोल त्रिशंकु विधानसभा की ओर संकेत दे रहे हैं।
यहां पर एक बात गौर करने वाली है कि अब तक देश मे हुए चुनावो में अनेक एग्जिट पोल्स के रिकॉर्डों को देखें, तो ओपिनियन पोल्स की तरह यह भी पूरी तरह से सही नहीं निकले हैं। ऐसे में यूपी, पंजाब, गुजरात एवं बिहार में हुए चुनावों पर आए एग्जिट पोल्स पर गौर करें तो कर्नाटक एग्जिट पोल पर भी भरोसा करना पाना बहुत कठिन है।
अभी एक ताजे सर्वे के अनुसार कर्नाटक में न तो बीजेपी और न ही कांग्रेस की सरकार बनती नजर आ रही है। ऐसे में एचडी देवेगौड़ा की अगुआई वाली पार्टी जनता दल (एस) भी किंग मेकर की भूमिका अदा करने में सक्षम हो सकती है। ऐसी हालात में किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगोड़ा की क्षेत्रीय पार्टी जनता दल सेक्युलर का सहयोग लेने से भी इनकार नही किया जा सकता है, और यदि त्रिशंकु जनादेश मिलता है तो ऐसी स्थिति में जेडीएस किंग मेकर की भूमिका अदा कर सकती है।
कर्नाटक में किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 112 से अधिक सीटों की आवश्यकता होगी। कर्नाटक राज्य में विधानसभा की कुल 224 सीटें हैं जिसमें से 222 सीटों पर वर्तमान समय मे मतदान हुआ है जिसका परिणाम 15 मई यानीकि कल को आनेवाला है।
कर्नाटक में हुए चुनाव में यदि अलग- अलग सभी टीवी चैनलों पर प्रसारित हुए आठ एग्जिट पोल का औसत निकाला जाय तो भाजपा को 103 सीटें, कांग्रेस को 85 सीटें एवं जेडीएस को 32 सीटें एवं अन्य को दो-दो सीटें मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही हैं। ऐसे में इस परिणाम में किसी भी दल को बहुमत नही मिलने आशंका वक्त की गई है।
एक समय यहां पर कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से छाई हुई थी। कांग्रेस वर्तमान मे लगभग सभी राज्यों के शासन सत्ता से धीरे-धीरे बाहर होती चली गई तब से वह किसी भी राज्य में ऐसी कोई करिश्मा भी नही दिखा पाई कि जिससे वहां के वोटरों को आकर्षित किया या कर पाने में सक्षम हुई हो वल्कि इसके विपरीत धीरे-धीरे सभी राज्यों में उसने अपने जनाधार खोती चली गई। जबकि इस बार कर्नाटक चुनाव के लिए 2600 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें से 2400 पुरुष थे तो वहीं, 200 उम्मीदवार महिलाये भी थी। इसके अलावा 58,008 पोलिंग बूथ बनाए गए थे।
इस बार यहां के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राजनीति में अपने भविष्य को लेकर बहुत बड़ी घोषणा किया है कि यह चुनाव उनके राजनीतिक करियर का आखिरी चुनाव होगा और इसके बाद वे कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने इस दौरान कर्नाटक राज्य में फिर से कांग्रेस के सत्ता में वापस आने का भी दावा करते हुए उन्होंने यहां तक दिया कि दक्षिण भारत के राज्य में कांग्रेस ही सत्ता में आएगी। चामुंडेश्वरी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस नेता ने दलित मुख्यमंत्री बनने की संभावनों के प्रश्न पर कहा कि पार्टी यदि दलित मुख्यमंत्री पर निर्णय करती है तो यह अच्छी बात होगी।
कुल मिला कर यदि हम देखें तो इससे यही पता चलता है कि इस कर्नाटक राज्य में पूर्ण बहुमत वाली किसी भी पार्टी की सरकार बनती नजर नही आ रही है।







