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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    विपरीत परिस्थितियों से जूझते किसान

    By May 11, 2020 Current Issues No Comments6 Mins Read
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    जी के चक्रवर्ती

    हमारे देश में सभी वर्ग के लोगों के व्यापारिक क्रिया कलापों के एकदम से ठप हो जाने की वजह से उन्हें बहुत बड़ी आर्थिक व व्यापारिक हानि उठानी पड़ी है सबसे बड़ी मुसीबत तो हमारे देश के किसानों की है। हम सभी लोगों को यह पता है कि “जान है तो ही जहान है।” लेकिन आज हमारे किसान भाई विशेषकर फल, फूल और सब्जियां उगाने वाले किसानों की स्थिति ऐसी है कि न किसी से कहने की और न सहने लायक ही हैं। आज किसानों को अपने उपज की बेहद कम दाम मिल रहें हैं दाम कम मिलने के पीछे लॉकडाउन होने के कारण चीजों की मांग बहुत कम हो जाने से उसे खरीदने वाला कोई नहीं है, ऊपर जो लोग किसानों से सब्जियां खरीद भी रहे है तो उसे अपना माल औने-पौने भाव मे बेचना पड़ रहा है। इसके साथ ही शासन, प्रशासन एवं पुलिस की सख्ती के चलते साधनों के नहीं मिलने के कारण अधिकांश राज्यों के किसान अपने फल, फूल व सब्जियों को अपने पास पड़ोस की मंडियों तक में भी नहीं पहुंचा पा रहे थे ऊपर से बेमौसम आंधी पानी के आने से किसानों के खेतों में खड़ी फसलें खड़ी-खड़ी बर्बाद होती चली जा रही हैं, ऐसे में बेचारा किसान गुमशुम, मजबूर लाचार होकर अपने फसलों को बर्बाद होते देखने के लिये मजबूर उसे इस बर्बादी के चक्रव्यूह से बाहर निकलने का कोई रास्ता भी उन्हें सूझाई नहीं दे रहा है।

    साभार: google
    यदि फल-फूल उगने वाले किसानों की बात करें तो देश में मांग कम होने की बजह से मंडी तक अपने माल को पहुंचाने की समस्या के कारण उनके कच्चे माल रखे-रखे ही सड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में तिलहनी और दलहनी फसलों के पहले ही ओला बृष्टि अंधी -पानी से बहुत नुकसान होंने के बाद बची फसलों को लेकर किसान बहुत परेशान थे, ऊपर से इस देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से देश में मांग बेहद कम हो गयी है और रही सही कसर ट्रांसपोर्ट की आवाजाही बन्द होने से अपने माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने की उचित व्यवस्था न होने से उन्हें बहुत तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

    इससे सबसे बड़ी चिंता की बात तो यह है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के विश्वविख्यात आम मलीहाबादी दशहरी के साथ ही चौसा, लंगड़ा, फाजली, मल्लिका, रटोल, गुलाब जामुन, रामकेला और आम्रपाली आदि जौसी आमों की फसल आना शुरू हो होने वाली थी लेकिन लॉकडाउन खुलने के बाद भी मौजूदा हालातों में इन नस्लों के आमों के निर्यात होना क्या संभव हो पायेगा?


    फिलहाल आंधी -पानी ने आम की फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाया है, मौजूदा वख्त के हालातों को देख कर नही लग रहा है, कि किसान अपने मौजूदा स्थिती से उभर पायेंगे, इसलिए प्रशासन को अभी से समय रहते देश के किसानों के साथ तालमेल बैठा कर इन आमों को मंडियों तक पहुंचाने के लिए तैयारी करना पड़ेगा, जिससे आम की फसलों को देश की विभिन्न मंडियों तक आसानी से पहुंचाया जा सकें। हमारे देश में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश आम के प्रमुख उत्पादक प्रदेश हैं और देश के विभिन्न राज्यों में से उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर हैं। अभी अभी आंधी पानी की बजह से कच्चे आम पेड़ से टूट कर नीचे गिर जाने से इस बार बाजारों में आम की आमद बहुत कम होने से शायद इस बार इन आमों के शक्ल तक देखने को न मिले यहीं हाल केला, नींबू, संतरा, मौसमी, अनार, पपीता आदि मैसमी फलों के साथ है।

    वहीं हम देश में फूलों की खेती होने वाले राज्यों की बात करें तो उनमे मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के किसानों की हालत तो बहुत खराब होने के कारण इन प्रदेशों में पैदा होने वाली फूलों की सबसे अधिक उपयोग करने वाली सभी फैक्ट्रियां लॉकडाउन की बजह से बन्द पड़े हैं, इसके साथ ही सामाजिक सरोकार रखने वाली गतिविधियां जैसे शादीयां, मंदिरें व अन्य सभी तरह कार्यक्रमों के बंद होने से फूलों की मांग बिल्कुल समाप्त हो जाने से गुलाब, मोगरा, नौरंगा, गेंदा, जरबेरा व अन्य देशी और विदेशी फूलों की खेती करने वाले किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तरफ तो उनका माल बिल्कुल भी बिक नहीं रहा दुसरी तरफ फूलों के पौधों को बचाने के लिए खेतों व ग्रीन हाउस में बिना बिके ही फूलों को लगातार तुड़वाने के पैसे मजदूरों को देने पड़ रहे है। कुछ जगह तो किसानों ने निराश व परेशान होकर खड़ी फूलों की फसल की जुताई तक कर डाली है। हमारे देश की मौजूदा सरकार को ऐसे किसान भाइयों को राहत देने के विषय में अवश्य सोचना होगा।

    भारत में हरी सब्जियों की खेती की हिसाब से सर्दियों के बाद का ये मार्च, अप्रैल व मई का माह बहुत अच्छा समय माना जाता है। आलू, मटर, गाजर, बैंगन, फूल गोभी, पत्ता गोभी, लौकी, तरोई, कद्दू, काशीफल, खीरा, ककड़ी, टमाटर, भिंडी, तरबूज, खरबूजा, मूली, शलजम, चकूंदर, परवल, शिमला मिर्च, हरी मिर्च, कुंदरू, टिंडा, करेला, सेम की फली, गवार की फली, लोबिया की फली जैसी सब्जियों कि पैदावार हमारे देश मे अधिक मात्रा में होती हैं। जून, जुलाई के महीनों में तीखी गर्मियां में सबके गले को तर करने वाली खीरा, ककड़ी, खरबूजे और तरबूज की मांग बहुत अधिक हो जाती है। जिसके कारण इन फसलों से किसानों की अच्छी आमदनी हो जाया करती थी लेकिन इसबार किसानों को इस तरह के सभी फसलों से भारी नुकसान हुआ है।

    इस तरह के फसलें ऐसी नहीं है जिसे अधिक दिनों तक रोके रखा जा सके या फिर किसी तरह से उन्हें शीत ग्रह में रखा जा सकें।

    आज देश मे लॉकडाउन की बजह से सब्जियों की बेहद कम मांग होने से अधिकांश फसल खेतों में सड़ रही है, इसलिए किसान सब्जियों की खड़ी फसलों की जुताई करवाना ज्यादा उचित समझ कर उसे अंजाम देने लगे है। सरकार को इन सभी किसानों की मदद करने के लिए आगे आना होगा। क्योंकि कोरोना आपातकाल के लॉकडाउन के दैरान फल, फूल व सब्जियों की खेती करने वाले सभी किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। केंद्र व राज्य सरकारों को समय रहते सभी किसानों बहुत अधिक राहत देने की आवश्यकता है इस परिपेक्ष उनके सहायता स्वरूप मूल्य रहित बीजों का वितरण करवाना, मूल्य रहित कीटनाशक दवा एवं खाद पानी देने का निर्णय लेना पड़ेगा और किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे के रूप में किसानों को विशेष आर्थिक सहायता राशि भी देने की व्यवस्था किये जाने के साथ ही साथ किसानों के लिए कर्ज माफी, बिजली का बिलों में छूट दिये जाने जैसी योजनाओं को समय रहते उन लीगों तक पहुँचाना होगा कि जिससे वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े होकर फल-फूल व सब्जियों की फसलों की बुवाई की तैयारी समय से कर सकें।

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